अजयारविंद नामदेव, शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में जंगली हाथियों की लगातार दस्तक से दहशतजदा ग्रामीणों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। हाथियों के खौफ के साए में जी रहे ग्रामीण परिवारों की सुरक्षा के लिए वन विभाग ने एक बड़ा और स्थायी हल तलाशने की पहल की है। वन विभाग ने हाथी प्रभावित क्षेत्रों के कच्चे मकानों को चिन्हित कर उन्हें ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ से जोड़ने का एक विशेष प्रस्ताव तैयार कर कलेक्टर को भेजा है, ताकि ग्रामीणों को पक्की छत के रूप में एक मजबूत सुरक्षा कवच मिल सके।
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अनाज की महक से घरों तक पहुंच रहे 25 हाथी, 22 गांवों में 717 कच्चे मकान चिन्हित
उत्तर वनमंडलाधिकारी (DFO) तरुणा वर्मा ने बताया कि ब्यौहारी वन परिक्षेत्र में फिलहाल करीब 25 हाथियों का दल मौजूद है। ये हाथी अक्सर रात के समय भोजन की तलाश में जंगल से निकलकर आबादी वाले इलाकों में पहुंचते हैं। कच्चे मकानों में रखे अनाज की गंध हाथियों को आकर्षित करती है, जिससे वे खपरैल और कच्ची दीवारों वाले घरों को निशाना बनाकर क्षतिग्रस्त कर देते हैं। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए वन विभाग ने सर्वे कराकर 22 गांवों के 717 कच्चे मकानों को चिन्हित किया है।
किस गांव में कितने कच्चे मकानों पर मंडरा रहा खतरा?
वन विभाग की ओर से कराए गए सर्वे के मुताबिक, अमझोर में 102, शहडोल में 84, रामगढ़ और सतसरी में 56-56, झिरिया में 53, चंदेल में 44, बकड़ाडोल में 42, टेका में 38 और बाटो में 37 कच्चे मकान चिन्हित किए गए हैं। जंगल की सीमा से लगे इन गांवों में रह रहे सैकड़ों परिवारों के मकानों को हाथियों की आवाजाही के दौरान लगातार नुकसान का खतरा बना रहता है।
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शहडोल समेत संभाग भर में फैला हाथियों का मूवमेंट
शहडोल के अलावा अनूपपुर, उमरिया और सीधी जिले के आबादी वाले इलाकों में भी जंगली हाथियों का मूवमेंट लगातार दर्ज किया जा रहा है। वर्तमान में ब्यौहारी क्षेत्र में मौजूद हाथियों के दल को देखते हुए वन अमला ग्रामीणों को लगातार अलर्ट कर रहा है और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील कर रहा है। अब तक प्रशासन का ध्यान सिर्फ फौरी राहत, निगरानी और सुरक्षा उपायों पर ही टिका था, लेकिन इस नए प्रस्ताव को हरी झंडी मिलने के बाद पक्के आवास ग्रामीणों के लिए दीर्घकालिक सुरक्षा का काम करेंगे। इससे हाथी-मानव संघर्ष के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
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