अजयारविंद नामदेव, शहडोल। जंगलों में इंसानी दखल बढ़ रहा है, पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हो रही है और इसका असर अब वन्यजीवों की आवाजाही पर भी दिखाई देने लगा है। जंगलों में रहने वाले वन्यजीव अब रिहायशी इलाकों के आसपास नजर आने लगे हैं। शहडोल में एक ओर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से हाथियों का झुंड पहुंच गया है, तो दूसरी ओर देवरी अमलाई में भालू की लगातार दस्तक ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। वन्यजीवों की बढ़ती आवाजाही ने वन विभाग की चुनौती भी बढ़ा दी है।
उमरिया जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से निकला हाथियों का झुंड उत्तर शहडोल वनमंडल के जंगलों से होते हुए दक्षिण शहडोल वनमंडल के खन्नौधी परिक्षेत्र अंतर्गत सन्ना बीट के कक्ष क्रमांक आरएफ-562 में विचरण कर रहा है। वन विभाग के मुताबिक, फिलहाल किसी जनहानि या नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन हाथियों की मौजूदगी को देखते हुए आसपास के गांवों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
हाथियों की सुरक्षा में 10 से अधिक गांवों की बिजली बंद
हाल ही में करंट की चपेट में आने से एक हाथी की मौत की घटना के बाद वन विभाग और बिजली विभाग विशेष सतर्कता बरत रहे हैं। हाथियों को संभावित बिजली दुर्घटनाओं से बचाने के लिए जयसिंहनगर वन क्षेत्र के कनाड़ी, देवरी, नदना, गिरुई सहित 10 से अधिक गांवों की बिजली आपूर्ति बंद की गई है। इससे ग्रामीणों को बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है। वहीं वन विभाग ने बिजली लाइनों को निर्धारित ऊंचाई पर रखने और क्षतिग्रस्त लाइनों को तत्काल दुरुस्त कराने के निर्देश दिए हैं।
देवरी अमलाई में भालू की लगातार दस्तक
इधर, दक्षिण शहडोल वनमंडल के केशवाही वन परिक्षेत्र अंतर्गत देवरी अमलाई गांव में भालू की लगातार आवाजाही से ग्रामीण दहशत में हैं। भालू रिहायशी इलाके के आसपास नजर आया, जिसका वीडियो ग्रामीणों ने मोबाइल में कैद किया, वन विभाग की टीम निगरानी कर रही है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
जंगलों की कटाई और वन्यजीवों का बढ़ता संघर्ष
शहडोल से लगे उमरिया जिले के घुनघुटी क्षेत्र और अनूपपुर के अमरकंटक जंगलों में पेड़ों की कटाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में जंगलों में बढ़ती मानवीय दखल और वन क्षेत्रों के सिकुड़ने का वन्यजीवों की आवाजाही पर क्या असर पड़ रहा है, इसकी गंभीरता से पड़ताल जरूरी है। हाथियों और भालू की रिहायशी इलाकों के आसपास बढ़ती मौजूदगी केवल ग्रामीणों की सुरक्षा का सवाल नहीं, बल्कि जंगल और वन्यजीवों के संरक्षण से जुड़ी बड़ी चुनौती भी है।

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