देवास। देवास जिले के खातेगांव में ड्यूटी पर तैनात रहते हुए शराब माफिया का शिकार बने थाना प्रभारी (TI) दिलीप पूरी की शहादत के बाद उनके पैतृक गांव बरमंडल में मातम पसरा हुआ है। सोमवार को जब गांव के लाड़ले की मौत की दुखद सूचना पहुंची, तो पूरा गांव स्तब्ध रह गया। परिवार का सबसे बड़ा और समझदार बेटा दुनिया से चला गया, जिससे परिजनों के साथ-साथ पूरे गांव में गहरा आक्रोश और शोक का माहौल है।
सोमवार दोपहर बाद जब शहीद टीआई दिलीप पूरी की अंतिम यात्रा निकली, तो हर शख्स की आंखें नम थीं। प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने पार्थिव शरीर को कंधा दिया। नगर में गमगीन माहौल में यात्रा निकालकर दशनाम गोस्वामी समाज की परंपरा के अनुसार पैतृक गांव में मठ की भूमि पर उन्हें समाधि दी गई। तिरंगे में लिपटे बेटे के शव को देखकर माता-पिता और भाई-बहन फूट-फूटकर रो पड़े।
पिता की दो टूक- हत्यारों को हो फांसी
शराब माफियाओं द्वारा निर्ममतापूर्वक की गई इस हत्या के बाद परिवार और ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिली। शहीद टीआई दिलीप पूरी के पिता ओमप्रकाश पूरी ने रुंधे गले से सरकार और प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि उनके बेटे के हत्यारों को फांसी की सजा से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। उन्होंने मांग की कि सरकार शराब माफियाओं के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई करे और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए CBI जांच कराई जाए।
संघर्षों से पढ़कर टीआई बने थे दिलीप, परिवार पर था बड़ा सहारा
पांच भाई-बहनों में सबसे बड़े और समझदार दिलीप पूरी शुरू से ही पढ़ाई में बेहद अव्वल रहे। कड़े संघर्षों के बीच अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद दिलीप पूरी ने पहले शिक्षा विभाग में अपनी सेवाएं दीं और इसके बाद पुलिस सेवा में आकर ईमानदारी की मिसाल पेश की। लेकिन, शराब सिंडीकेट और अवैध तस्करी पर नकेल कसने के उनके मजबूत इरादों ने ही अंततः उनकी जान ले ली। गांव में जब उनकी अंतिम विदाई हुई, तो हर आंख नम थी और हर कोई उनके जज्बे को सलाम कर रहा था।
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