प्रदीप मालवीय, उज्जैन। धर्मनगरी और बाबा महाकाल की पावन नगरी उज्जैन में सोमवार को सड़क चौड़ीकरण अभियान के दौरान उस समय भारी हंगामा और उपद्रव हो गया, जब शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक विवादित पोस्ट और वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ असामाजिक तत्वों ने महाकाल मंदिर को लेकर बेहद आपत्तिजनक और भड़काऊ टिप्पणी की। इस वायरल पोस्ट को लेकर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और विभिन्न हिंदूवादी संगठनों ने कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है।
विश्व हिंदू परिषद के प्रांत सह मंत्री महेश आंजना ने प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि उज्जैन देश-दुनिया में अवंतिका नगरी और बाबा महाकाल की आस्था का विशाल केंद्र है, जो करोड़ों लोगों की धार्मिक श्रद्धा का आधार है। महाकाल मंदिर पर इस प्रकार की दुस्साहसपूर्ण और अशोभनीय टिप्पणी किसी भी सूरत में सहन नहीं की जाएगी।
भोपाल और स्थानीय युवकों पर एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी
विश्व हिंदू परिषद ने स्पष्ट किया है कि भोपाल और स्थानीय क्षेत्र के जिन दो विशिष्ट फेसबुक यूजर ने यह भड़काऊ और विवादित पोस्ट की है, उनके खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराने के लिए लिखित आवेदन तैयार कर लिया गया है । विहिप ने शासन और न्यायालय से मांग की है कि ऐसे देशविरोधी और सौहार्द बिगड़ने वाले तत्वों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई की जाए, उनके मकानों पर बुलडोजर चलाकर कड़ा संदेश दिया जाए और कानून के तहत कठोरतम दंड सुनिश्चित किया जाए ।
फिलहाल, पुलिस प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और सोशल मीडिया पर भ्रामक व भड़काऊ सामग्री फैलाने वालों की साइबर सेल के माध्यम से पहचान की जा रही है।
बता दें कि बीते दिनों शाही मस्जिद का एक हिस्सा हटाने के दौरान प्रशासनिक टीम की मौजूदगी में मुस्लिम समाज के कुछ असामाजिक तत्वों ने विरोध जताते हुए जमकर पथराव किया और वाहनों में तोड़फोड़ की। उपद्रवियों को खदेड़ने के लिए पुलिस ने शुरुआत में आंसू गैस के गोले छोड़े। इसके बावजूद उपद्रवियों की भीड़ दोबारा एकत्रित हुई और पुलिस बल पर फिर से पत्थर बरसाने शुरू कर दिए । इस हमले में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। स्थिति को नियंत्रण में लेने के लिए पुलिस को आखिर में लाठीचार्ज करना पड़ा।
इस घटना के बाद शहर के माहौल में भारी तनाव व्याप्त हो गया है। चौड़ीकरण की प्रक्रिया के दौरान हिंदू समाज और संगठनों का कहना है कि सड़क विकास के लिए पूर्व में कई मंदिरों को बिना किसी विरोध के हटाया गया था, परंतु इस तरह की हिंसा और पुलिस पर हमला कतई बर्दाश्त करने योग्य नहीं है।
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