शाहजहांपुर में मंगलवार को एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का प्रतीकात्मक पुतला जलाया, जिसके बाद पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच टकराव हुआ. खींचतान के दौरान युवा नेता राहिल अंसारी की अंगुलियों में चोट आई और युवक कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामजी अवस्थी की कमीज के बटन टूट गए.

शाहजहांपुर. जिले में मंगलवार को नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का प्रतीकात्मक पुतला जलाया. दोपहर करीब 12 बजे जिलाध्यक्ष रफी उल हसन के नेतृत्व में कार्यकर्ता एकत्र हुए थे. प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच कई बार धक्का-मुक्की और नोकझोंक हुई, जिसमें एक युवा नेता की अंगुलियों में चोट लग गई.

पुलिस की मौजूदगी में पुतला दहन

प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने कार्यालय के मुख्य द्वार और दूसरे निकास पर छह उपनिरीक्षकों समेत पुलिसकर्मियों की तैनाती की थी. दोपहर करीब एक बजे कार्यकर्ता बाहर निकले और पुलिसकर्मियों के सामने नारेबाजी करने लगे.

इसी दौरान एक कार्यकर्ता पेट्रोल से भीगा मुख्य चुनाव आयुक्त का प्रतीकात्मक पुतला लेकर पहुंचा और उसमें आग लगा दी. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पीछे धकेलते हुए पुतले को बुझाने की कोशिश की. इस दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने एक उपनिरीक्षक को पीछे से पकड़कर रोकने का प्रयास किया. पुलिस ने जलते पुतले को बुझाकर उसके कुछ अवशेष अपने कब्जे में ले लिए.

पुतले के अवशेष पर खींचतान

पुलिस जब पुतले के बचे हुए हिस्से लेकर आरएसएस कार्यालय वाली गली की ओर पहुंची, तब युवक कांग्रेस के जिलाध्यक्ष रामजी अवस्थी अन्य कार्यकर्ताओं के साथ वहां पहुंचे. उन्होंने पुलिस से पुतले के अवशेष लेने का प्रयास किया, जिसके बाद फिर से खींचतान शुरू हो गई.

आरोप है कि इस दौरान एक उपनिरीक्षक ने रामजी अवस्थी का गिरेबान पकड़ लिया. इस पर कार्यकर्ता नाराज हो गए और दोबारा पुतला दहन करने की चेतावनी देने लगे.

खींचतान के दौरान युवा नेता राहिल अंसारी की अंगुलियों में चोट लग गई और खून निकलने लगा. वहीं, रामजी अवस्थी की कमीज के बटन टूट गए. स्थिति बिगड़ती देख कांग्रेस जिलाध्यक्ष रजनीश गुप्ता मौके पर पहुंचे और कार्यकर्ताओं को शांत कराया.

पुलिसकर्मी से हुई बहस

पुतला दहन के दौरान पीसीसी सदस्य कृष्ण विनोद मिश्रा और एक उपनिरीक्षक के बीच भी विवाद हो गया. दोनों के बीच बहस बढ़ने पर अपशब्दों के इस्तेमाल का आरोप लगा. आरोप है कि उपनिरीक्षक की एक टिप्पणी से कांग्रेस कार्यकर्ता नाराज हो गए और हंगामा करने लगे.

कार्यकर्ताओं ने पुलिसकर्मियों की नेम प्लेट नहीं होने पर भी आपत्ति जताई. इसके बाद अन्य उपनिरीक्षकों ने युवाओं को कार्यालय के अंदर ले जाकर स्थिति को शांत कराया.

प्रदर्शन में फरीद अली खान, सईद अंसारी, संजय सक्सेना, फुरकान अहमद कुरैशी, फरमान खान, परवेज अहमद, आमिल खान, सरताज खान, अनुभव द्विवेदी, अध्ययन आनंद और अजीम समेत अन्य कार्यकर्ता शामिल रहे.

कांग्रेस और पुलिस का पक्ष

कांग्रेस जिलाध्यक्ष रजनीश गुप्ता ने आरोप लगाया कि पुलिस विपक्ष की लोकतांत्रिक आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि विरोध दर्ज कराना विपक्ष का अधिकार है और पुलिस को अपनी भूमिका निष्पक्ष रखनी चाहिए.

वहीं, सीओ सिटी देवव्रत वाजपेयी ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान मामूली नोकझोंक हुई थी.