प्रदीप मालवीय, उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही मां हरसिद्धि मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी है। नवरात्रि के पहले दिन सुबह से ही माता रानी के दरबार में भक्तों का तांता लगा हुआ है। देश-विदेश से श्रद्धालु मां के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। भक्त फूल, प्रसाद और चुनरी लेकर माता रानी के दरबार में हाजिरी लगा रहे हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं। मां हरसिद्धि अपने दिव्य स्वरूप में भक्तों को दर्शन दे रही हैं । मंदिर परिसर में नवरात्रि के पहले दिन से ही भक्ति और आस्था का माहौल देखने को मिल रहा है।

51 शक्तिपीठों में शामिल है मां हरसिद्धि मंदिर

मां हरसिद्धि मंदिर का धार्मिक और पौराणिक महत्व बहुत खास माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब माता सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में देह त्याग दी थी, तब भगवान शिव उनके पार्थिव शरीर को लेकर शोक में विचरण करने लगे । मान्यता है कि भगवान विष्णु ने सृष्टि का संतुलन बनाए रखने के लिए अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के अंग अलग किए थे । जहां-जहां उनके अंग और आभूषण गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ के रूप में पूजे जाने लगे । मां हरसिद्धि मंदिर को भी 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहां माता सती की कोहनी गिरी थी ।

राजा विक्रमादित्य की आराध्य देवी

मां हरसिद्धि मंदिर का संबंध उज्जैन के प्रसिद्ध राजा विक्रमादित्य से भी जुड़ा है। परंपरा और लोककथाओं में मां हरसिद्धि को राजा विक्रमादित्य की आराध्य देवी बताया जाता है। ऐसी कथाएं प्रचलित हैं कि राजा विक्रमादित्य मां के अनन्य भक्त थे और उन्होंने देवी की आराधना में अपना जीवन समर्पित किया था। मंदिर से जुड़ी ये मान्यताएं इसे उज्जैन की प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाती हैं ।

दीपमालिकाएं और श्री यंत्र हैं खास आकर्षण

मंदिर परिसर में स्थित दो विशाल दीपमालिकाएं यहां की खास पहचान हैं। संध्या आरती के समय दीपमालिकाओं में दीप प्रज्वलित किए जाते हैं, तो पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण से भर उठता है। इसके अलावा मंदिर में स्थापित श्री यंत्र भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। श्री यंत्र को शक्ति उपासना की परंपरा में पवित्र प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु इसके दर्शन कर मां का आशीर्वाद लेते हैं।

नवरात्रि में विशेष पूजा-अर्चना

नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व है। इस दौरान मां हरसिद्धि के मंदिर में भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं। भक्त व्रत रखते हैं, चुनरी और फूल अर्पित करते हैं तथा अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए माता रानी से प्रार्थना करते हैं। सालभर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहने वाला यह मंदिर नवरात्रि में विशेष रौनक से भर जाता है।

मां हरसिद्धि मंदिर केवल पूजा का स्थान ही नहीं, बल्कि उज्जैन की धार्मिक पहचान, पौराणिक मान्यताओं और सदियों पुरानी आस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल भी है।

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