Dharm Desk :- शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की अराधना करने वाले भक्तों के लिए 9 दिनों के व्रत का विशेष महत्व है। कई श्रद्धालु पूरे नौ दिन उपवास रखते हैं और महानवमी पर कन्या पूजन, हवन तथा मां दुर्गा की विशेष पूजा करने के बाद व्रत खोलते है। वहीं, कुछ भक्त नवमी तिथि पूरी होने के बाद दशमी तिथि में पारण करते हैं। इस बार महानवमी 19 अक्टूबर, सोमवार को मनाई जा रही है, जबकि विजयादशमी 20 अक्टूबर, मंगलवार को है।

पंचांग के अनुसार, नवमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर लगभग 12:50 बजे तक रहेगी। ऐसे में पूरे नौ दिन व्रत रखने वाले भक्तों के मन में सवाल है कि उन्हें 19 अक्टूबर को पूजा के बाद व्रत खोलना चाहिए या 20 अक्टूबर को नवमी तिथि समाप्त होने के बाद पारण करना चाहिए।

19 अक्टूबर को व्रत खोलें या 20 अक्टूबर को?

जो श्रद्धालु पूरे 9 दिनों तक नवरात्रि का व्रत रखते हैं, वे अपनी पारिवारिक परंपरा और व्रत के संकल्प के अनुसार पारण कर सकते है। जिन घरों में महानवमी पर कन्या पूजन और हवन के बाद व्रत खोलने की परंपरा है, वहां 19 अक्टूबर को पूजा-विधान पूरा करने के बाद पारण किया जा सकता है। वहीं, जो भक्त नवमी तिथि समाप्त होने तक उपवास रखते हैं, वे 20 अक्टूबर को दोपहर लगभग 12:50 बजे नवमी तिथि पूरी होने के बाद दशमी में पारण कर सकते है। पारण का समय तय करते समय स्थानीय पंचांग और अपनी परंपरा का ध्यान रखना चाहिए।

कन्या पूजन और हवन के बाद करें पारण

महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ कन्या पूजन का विशेष महत्व है। इस दिन भक्त कन्याओं को देवी स्व रूप मानकर उनका पूजन करते है और उन्हें भोजन कराते है। इसके बाद दक्षिणा और उपहार देकर आर्शीवाद लेते हैं। जिन परिवारों में हवन करने की परंपरा है, वहां पूजा और हवन संपन्न होने के बाद मां दुर्गा को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण किया जाता है। इसके बाद श्रद्धालु अपना व्रत खोल सकते हैं ।

पारण से पहले गाय माता के लिए निकालें भोजन

नवरात्रि का व्रत खोलने से पहले गाय के लिए भोजन का एक हिस्सा निकालना भी कई परिवारों की परंपरा में शामिल है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार गाय को रोटी, गुड़ या अन्य उपयुक्त भोजन खिला सकते हैं। इसके बाद फलाहार या भोजन ग्रहण करके व्रत पूरा किया जा सकता है । यदि नौ दिनों तक कठोर उपवास रखा है, तो पारण के समय पहले पानी और हल्का भोजन लें तथा धीरे-धीरे सामान्य आहार शुरू करें।