Business Desk- Share Market Crash : 2026 में शेयर बाजार की कमजोरी का असर सिर्फ बेंचमार्क इंडेक्स तक सीमित नहीं रहा। इंडेक्स से बाहर भी बड़ी संख्या में मिड और लार्ज-कैप कंपनियों के शेयरों ने निवेशकों को नुकसान पहुंचाया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1,000 करोड़ रुपए या उससे ज्यादा मार्केट कैप वाली 920 कंपनियों में से 466 यानी 51% कंपनियों का इस साल अब तक रिटर्न शून्य या निगेटिव रहा है। इस एनालिसिस में उन्हीं कंपनियों को शामिल किया गया है, जिनके पिछले पांच साल के वैल्यूएशन का डेटा उपलब्ध है।

गिरावट की गहराई का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 8 कंपनियों ने सिर्फ 9 महीनों में अपनी 50% से ज्यादा मार्केट कैप गंवा दी। इनमें राजेश एक्सपोर्ट्स, KPIT टेक्नोलॉजीज, यूग्रो कैपिटल, GRM ओवरसीज, CE Info Systems, फिनो पेमेंट्स बैंक, रामकी इन्फ्रास्ट्रक्चर और KEC इंटरनेशनल शामिल हैं। इन कंपनियों की वैल्यूएशन अब पिछले पांच साल के ऐतिहासिक औसत से भी नीचे आ गई है।

वहीं, 132 कंपनियों के शेयर इस साल की शुरुआत से 25% या उससे ज्यादा टूट चुके हैं। यानी करीब हर सात में से एक कंपनी के शेयर में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। इससे पता चलता है कि बाजार की कमजोरी का असर केवल इंडेक्स तक नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में कंपनियों पर पड़ा है।

कंपनी की अपनी परेशानियों ने भी बढ़ाया दबाव

बाजार की सामान्य कमजोरी के अलावा कंपनियों की अपनी समस्याओं ने भी शेयरों में गिरावट बढ़ाई। राजेश एक्सपोर्ट्स के प्रमोटर्स को रेगुलेटरी कार्रवाई के तहत सिक्योरिटीज मार्केट से बैन किया गया। इसका असर निवेशकों की धारणा पर पड़ा।

फिनो पेमेंट्स बैंक के शेयर पर कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों का दबाव रहा। वहीं, स्मॉल और मीडियम साइज एंटरप्राइजेज को कर्ज देने वाली यूग्रो कैपिटल पर बढ़ती फंडिंग लागत और ज्यादा ऑपरेटिंग खर्च का असर पड़ा।

KPIT Technologies को प्रमुख ग्राहकों की ओर से प्रोजेक्ट में देरी और टेक्नोलॉजी बजट में कमी की चुनौती मिली। CE Info Systems के मुनाफे के मार्जिन पर एक खास ग्राहक से मिलने वाली रकम को राइट-ऑफ करने का असर पड़ा। GRM Overseas को बढ़ती इनपुट लागत से मार्जिन दबाव झेलना पड़ा।

रामकी इन्फ्रास्ट्रक्चर और KEC International के मार्जिन पर भी ऊंची इनपुट लागत और प्रोजेक्ट पूरा करने में आ रही दिक्कतों का असर रहा।

FPI बिकवाली और क्रूड ने बढ़ाई चिंता

बाजार की कमजोरी के पीछे विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और जियोपॉलिटिकल तनाव भी अहम कारण रहे। ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ा है। भारत के लिए क्रूड की कीमतें अहम हैं, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPIs ने 2026 के पहले 9 महीनों में भारतीय इक्विटी से 3.05 लाख करोड़ रुपए की बिकवाली की। यह पिछले पूरे साल की 2.4 लाख करोड़ रुपए की बिकवाली से भी ज्यादा है। यानी 2026 के सिर्फ 9 महीनों में विदेशी निवेशकों ने पिछले पूरे साल के मुकाबले ज्यादा पैसा भारतीय शेयर बाजार से निकाल लिया।