Business Desk – Share Market Crash : पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। सऊदी अरामको पर ड्रोन हमले के बाद निवेशकों में घबराहट बढ़ी और शुरुआती कारोबार में बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप 5 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा घट गया।

सेंसेक्स 700 अंकों से अधिक फिसला, जबकि निफ्टी 50 गिरकर 22,550 के करीब पहुंच गया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली।

सेंसेक्स और निफ्टी में कितनी गिरावट?

सुबह 9:26 बजे सेंसेक्स 607.23 अंक यानी 0.82% गिरकर 73,102.46 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 50 में 232.50 अंक यानी 1.02% की गिरावट आई और यह 22,578.85 पर पहुंच गया।

कारोबार के दौरान सेंसेक्स 704.58 अंक टूटकर 73,005.11 तक आ गया था। निफ्टी भी 253.40 अंक गिरकर 22,557.95 के स्तर तक पहुंचा। व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में करीब 1% की गिरावट दर्ज की गई।

Share Market Crash की 4 बड़ी वजहें

  1. पश्चिमी एशिया में बढ़ा तनाव

सऊदी अरामको पर ड्रोन हमले और ईरान की मिलिट्री फोर्स IRGC की चेतावनी के बाद पश्चिमी एशिया में तनाव बढ़ गया। IRGC ने कहा कि ईरान पर हमला करने वाले देशों को बख्शा नहीं जाएगा। इस घटनाक्रम से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है। ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। महंगे कच्चे तेल से भारत की महंगाई और आयात बिल बढ़ने की आशंका निवेशकों की चिंता बढ़ा सकती है।

  1. सेंसेक्स डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी

बाजार पर दबाव की एक वजह सेंसेक्स के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी भी है। एक्सपायरी के दिन ट्रेडर्स को मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट्स की पोजिशन सेटल या बंद करनी पड़ सकती है। इससे बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है, खासकर जब वैश्विक घटनाक्रम पहले से निवेशकों की चिंता बढ़ा रहे हों।

  1. ऑटो, FMCG और मेटल शेयरों में बिकवाली

कारोबार के शुरुआती घंटों में सभी सेक्टोरल निफ्टी इंडेक्स लाल निशान में थे। ऑटो, FMCG और मेटल सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहे और इनके इंडेक्स में 1.5% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी फार्मा भी करीब 1% नीचे रहा। सरकारी और निजी बैंकों के इंडेक्स में लगभग आधा-आधा फीसदी की गिरावट आई।

  1. India VIX में उछाल

बाजार में घबराहट का संकेत देने वाला इंडिया VIX 5.07% बढ़कर 16.47 पर पहुंच गया। VIX में तेजी आम तौर पर निकट अवधि में बाजार के उतार-चढ़ाव को लेकर बढ़ती आशंका दर्शाती है। पश्चिमी एशिया का तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और एक्सपायरी से जुड़ी गतिविधियां बाजार की अस्थिरता बढ़ा सकती हैं।

निवेशकों के लिए क्या संकेत?

फिलहाल बाजार की दिशा पर वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और सेक्टरों में बिकवाली का असर दिखाई दे रहा है। आगे कारोबार में निवेशकों की नजर पश्चिमी एशिया से आने वाली खबरों, क्रूड की चाल और India VIX पर रहेगी। हालांकि, बाजार में गिरावट के दौरान जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय निवेशकों को अपनी जोखिम क्षमता और निवेश की अवधि को ध्यान में रखना चाहिए।