Prashakha Mathur APO: राजस्थान में 40 विला-कॉटेज की खरीद से जुड़े विवाद के बीच राज्य सरकार ने एक और वरिष्ठ अधिकारी पर कार्रवाई की है। 1995 बैच की IPS अधिकारी और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) डॉ. प्रशाखा माथुर को शनिवार को APO कर दिया गया।
कार्मिक विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। इससे पहले उनके पति और 1993 बैच के IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल को भी APO किया जा चुका है। अब IAS-IPS दंपती दोनों पदस्थापन की प्रतीक्षा में हैं। हालांकि, सरकार ने प्रशाखा माथुर को APO करने का कारण प्रशासनिक बताया है।

पहले IAS शिखर अग्रवाल पर हुई थी कार्रवाई
40 विला-कॉटेज की खरीद का मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार ने शिखर अग्रवाल को APO कर दिया था। वे लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम उद्यम विभाग के साथ दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर सहित कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके थे।
शिखर अग्रवाल, उनकी पत्नी प्रशाखा माथुर, दोनों बेटों और सास-ससुर के नाम पर 40 विला-कॉटेज की खरीद का मामला सामने आया था। इसके बाद शिखर अग्रवाल को APO किए जाने से प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई थी। उनके खिलाफ पद के कथित दुरुपयोग और सरकार को नुकसान पहुंचाने के आरोपों को लेकर ACB जांच की मंजूरी भी दी गई है।
पुलिस आयोजना एवं आधुनिकीकरण की ADG थीं प्रशाखा माथुर
डॉ. प्रशाखा माथुर 1995 बैच की IPS अधिकारी हैं। APO होने से पहले वे अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक पुलिस आयोजना एवं आधुनिकीकरण के पद पर तैनात थीं। अपने करियर में वे पुलिस IG मुख्यालय जयपुर और ADG इंटेलिजेंस दिल्ली जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुकी हैं। इसके अलावा सिरोही, जयपुर ग्रामीण, बांसवाड़ा, पाली और अजमेर में पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी भी संभाल चुकी हैं।
शिखर अग्रवाल के APO होने के बाद से ही उनकी पत्नी प्रशाखा माथुर को लेकर भी प्रशासनिक गलियारों में चर्चाएं चल रही थीं। अब उन्हें भी APO किए जाने के बाद दोनों अधिकारी पदस्थापन की प्रतीक्षा में हैं।
एक परिवार के दो वरिष्ठ अधिकारियों के APO होने की चर्चा
एक ही परिवार के दो वरिष्ठ IAS और IPS अधिकारियों को APO किए जाने के बाद राजस्थान के प्रशासनिक गलियारों में इस घटनाक्रम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। दोनों अधिकारी लंबे समय से प्रशासनिक और पुलिस सेवा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालते रहे हैं।
विपक्ष ने मुख्यमंत्री को घेरा
40 विला-कॉटेज खरीद मामले को लेकर विपक्ष लगातार राज्य सरकार पर सवाल उठा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली इस मामले में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को निशाने पर ले रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि कार्मिक विभाग और गृह विभाग दोनों मुख्यमंत्री के अधीन हैं। वहीं, सत्ताधारी दल के नेता सरकार की कार्रवाई को निष्पक्ष बता रहे हैं।
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