प्रमोद निर्मल, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी। जिले के बरारमुंडी गांव में ग्रामीणों द्वारा अपने दम पर शिवनाथ नदी के कटाव को रोकने के लिए किए जा रहे पचरी निर्माण की खबर का बड़ा असर हुआ है। गांव और मुख्य सड़क को डूबने से बचाने के लिए पिछले दो महीनों से ग्रामीणों द्वारा श्रमदान और चंदे से चलाए जा रहे इस अभियान को लल्लूराम डॉट कॉम ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर सामने आते ही प्रशासन हरकत में आ गया और वर्षों से अनदेखा किया जा रहा यह मुद्दा अचानक प्रशासनिक प्राथमिकता में शामिल हो गया।

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खबर प्रकाशित होने के बाद कलेक्टर ने पूरे मामले का संज्ञान लिया। उनके निर्देश पर क्षेत्रीय एसडीएम, सिंचाई विभाग के ईई और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची और हालात का जायजा लिया। निरीक्षण के बाद सिंचाई विभाग ने शिवनाथ नदी के किनारे कटाव रोकने के लिए करीब 6 करोड़ रुपये की लागत से प्रोटेक्शन वॉल निर्माण का प्रारंभिक इस्टीमेट तैयार किया है। कलेक्टर ने भी इसकी पुष्टि की है। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद आने वाले समय में बरारमुंडी गांव में बड़ा निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

दो महीने से खुद ही लड़ रहे थे गांव को बचाने की लड़ाई

बता दें कि शिवनाथ नदी के किनारे बसा बरारमुंडी गांव लंबे समय से नदी कटाव की समस्या से जूझ रहा है। हर बारिश में नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ कटाव तेज हो जाता है, जिससे गांव और मुख्य सड़क के नदी में समाने का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा था। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी थी कि सड़क का एक हिस्सा पहले ही कटाव की चपेट में आ चुका है और ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर आवाजाही करनी पड़ रही थी।

ग्रामीणों ने वर्षों तक जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से नदी कटाव रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की, लेकिन उनकी फरियाद लगातार अनसुनी होती रही। आखिरकार गांव के लोगों ने खुद ही पहल करने का फैसला लिया। गांव में बैठक कर हर घर से आर्थिक सहयोग और श्रमदान तय किया गया। इसके बाद ग्रामीणों ने चंदा इकट्ठा कर सीमेंट, गिट्टी, छड़ और अन्य निर्माण सामग्री खरीदी और खुद मजदूर व मिस्त्री बनकर नदी किनारे सीमेंट की पचरी बनानी शुरू कर दी।

महिला, पुरुष, बुजुर्ग और युवा रोजाना दो पालियों में निर्माण कार्य में जुटे रहे। बिना किसी सरकारी मदद के ग्रामीणों का यह संघर्ष लगातार दो महीनों तक चलता रहा, लेकिन इस दौरान न तो कोई बड़ा जनप्रतिनिधि गांव पहुंचा और न ही प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ।

खबर के बाद जागा प्रशासन

जैसे ही लल्लूराम डॉट कॉम ने ग्रामीणों की इस जद्दोजहद और प्रशासनिक उदासीनता को प्रमुखता से प्रकाशित किया, प्रशासनिक गलियारों में हलचल मच गई। लंबे समय से अनदेखा किया जा रहा मामला अचानक गंभीरता से लिया जाने लगा। अफसरों की टीम मौके पर पहुंची और नदी कटाव की वास्तविक स्थिति का निरीक्षण किया।

सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में नदी किनारे बड़े स्तर पर सुरक्षा निर्माण की आवश्यकता महसूस की गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए करीब 6 करोड़ रुपये लागत वाले प्रोटेक्शन वॉल प्रोजेक्ट का इस्टीमेट तैयार किया गया है। अब शासन स्तर से स्वीकृति मिलने का इंतजार किया जा रहा है।

ग्रामीणों के जज्बे की हर तरफ चर्चा

बरारमुंडी गांव के ग्रामीणों ने जिस तरह सरकारी मदद का इंतजार करने के बजाय खुद अपने गांव और सड़क को बचाने के लिए मोर्चा संभाला, उसकी अब पूरे इलाके में चर्चा हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते प्रशासन ने पहल नहीं की होती, तो आने वाले बारिश के मौसम में गांव और सड़क दोनों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता था।

अब खबर के असर के बाद ग्रामीणों को उम्मीद जगी है कि वर्षों पुरानी उनकी समस्या का स्थायी समाधान निकल सकेगा और शिवनाथ नदी के कटाव से गांव को सुरक्षित किया जा सकेगा।

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