परवेज खान, शिवपुरी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी शहर को सीवर की समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए शुरू की गई 113 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी सीवर परियोजना पूरी तरह भ्रष्टाचार की दीमक चढ़ गई है। दिशा की समीक्षा बैठक में शामिल होने शिवपुरी पहुंचे केंद्रीय मंत्री और स्थानीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मीडिया के सामने खुद इस बात को स्वीकार किया कि यह योजना करप्शन की भेंट चढ़ गई और पूरी तरह फेल साबित हुई है।

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दादा के जमाने की लाइन चालू, 113 करोड़ की नई लाइन ठप्प

पत्रकारों से चर्चा करते हुए सिंधिया ने दर्द बयां किया और कहा कि उनके दादा के ज़माने में बिछाई गई 15 किलोमीटर की सीवर लाइन में से 7 किलोमीटर आज भी सुचारू रूप से चालू है। वहीं दूसरी ओर, 113 करोड़ रुपये पानी की तरह बहाने के बाद भी नई सीवर लाइन चालू नहीं हो सकी।

खुद लाए थे प्रोजेक्ट, फिर भी भ्रष्टाचार की बलि चढ़ा

गौरतलब है कि वर्ष 2013 में इस प्रोजेक्ट को खुद ज्योतिरादित्य सिंधिया ही शिवपुरी लेकर आए थे। प्रोजेक्ट के शुरू होने से लेकर अब तक प्रदेश में भाजपा की सरकार रही है और समय-समय पर विधायकों से लेकर खुद सिंधिया इस परियोजना की समीक्षा करते रहे हैं। इसके बावजूद यह करोड़ों का प्रोजेक्ट अफसरों और ठेकेदारों की साठगांठ की भेंट चढ़ गया।

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कार्रवाई पर बने सवालिया निशान

हालांकि केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने यह तो खुलकर स्वीकार कर लिया कि योजना में भारी भ्रष्टाचार हुआ है, लेकिन इस गबन के जिम्मेदार भ्रष्ट अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई कब होगी, इसको लेकर स्थिति अब भी अस्पष्ट है। फिलहाल पूरा शहर सीवर के गंदे पानी की समस्या से जूझ रहा है और 113 करोड़ के जनता के पैसों के हिसाब पर हर तरफ सवाल उठ रहे हैं।

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