रायपुर। छत्तीसगढ़ में राजस्व से जुड़े मामले आम लोगों के लिए बेहद अहम होते हैं। जमीन-जायदाद के विवाद अक्सर लंबे समय तक चलते हैं और कई बार यही विवाद पारिवारिक कलह से लेकर गंभीर घटनाओं की वजह भी बन जाते हैं। ऐसे मामलों के त्वरित और पारदर्शी निराकरण को प्राथमिकता देते हुए राजनांदगांव जिला प्रशासन ने राजस्व प्रकरणों की विशेष मॉनिटरिंग शुरू की। इसके लिए गांव और पंचायत स्तर तक राजस्व शिविर लगाए गए और पंचायत अमले को भी सक्रिय किया गया। नतीजा यह रहा कि जिले में विवादित राजस्व प्रकरणों के निराकरण की दर में पिछले साल की तुलना में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है।

विवादित नामांतरण और खाता विभाजन के निराकरण में बड़ा सुधार

वर्ष 2025 एवं 2026 की तुलनात्मक स्थिति में विवादित राजस्व प्रकरणों के निराकरण में उल्लेखनीय सुधार सामने आया है।

विवादित नामांतरण के प्रकरणों में वर्ष 2025 में निराकरण दर 68.49 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2026 में बढ़कर 94.82 प्रतिशत हो गई।

इसी प्रकार विवादित खाता विभाजन के प्रकरणों में वर्ष 2025 में निराकरण दर 72.53 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2026 में बढ़कर 95.70 प्रतिशत हो गई।

इस प्रकार दोनों ही महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील राजस्व सेवाओं में एक वर्ष की अवधि में निराकरण दर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह सुधार राजस्व पखवाड़ा, पंचायत स्तर पर आयोजित शिविरों, नियमित सुनवाई तथा प्रकरणों की सतत मॉनिटरिंग का परिणाम है।

विभिन्न राजस्व सेवाओं के निराकरण में बेहतर प्रदर्शन

राजस्व वर्ष 2026 के दौरान जिले में विभिन्न राजस्व सेवाओं के आवेदनों के निराकरण में भी बेहतर प्रगति हुई है। अविवादित नामांतरण के 92.82 प्रतिशत, अविवादित खाता विभाजन के 94.10 प्रतिशत, सीमांकन के 99.91 प्रतिशत, व्यपवर्तन के 97.49 प्रतिशत, वृक्ष कटाई हेतु अनुमति के 100 प्रतिशत तथा भू-अभिलेख संबंधी कागज में गलत प्रविष्टि के सुधार के 90.62 प्रतिशत आवेदनों का निराकरण सुनिश्चित किया गया। शेष आवेदनों का भी नियमानुसार सुनवाई कर लगातार निराकरण किया जा रहा है।

राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक एवं पटवारियों के साथ पंचायत स्तर पर सरपंच एवं सचिवों के समन्वय से कार्य किया गया। विशेष रूप से विवादित प्रकरणों के लिए राजस्व शिविर एवं नियमित सुनवाई आयोजित की गई।

पंचायत स्तर तक पहुंची राजस्व सेवाएं

पंचायत अमले की सक्रिय भागीदारी से ग्रामीण क्षेत्रों में राजस्व सेवाओं की पहुंच और अधिक प्रभावी हुई। पंचायत स्तर पर आयोजित शिविरों के माध्यम से ग्रामीणों को उनके गांव के समीप ही राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। इससे नागरिकों को अनावश्यक रूप से तहसील एवं जिला कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिली तथा राजस्व प्रकरणों के निराकरण की प्रक्रिया अधिक सुगम हुई।

राजस्व वर्ष 2026 में 37 हजार से अधिक प्रकरणों का निराकरण

1 अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026 की अवधि में जिले में कुल 37,306 राजस्व प्रकरण दर्ज हुए, जिनमें से 34,939 प्रकरणों का निराकरण किया गया। इस अवधि में कुल निराकरण दर 93.66 प्रतिशत रही।

इसी अवधि में सीमांकन के 2,333 प्रकरणों में से 2,331, वृक्ष कटाई अनुमति के सभी 51 प्रकरण, व्यपवर्तन के 1,632 में से 1,591 प्रकरण तथा भू-अभिलेख प्रविष्टि सुधार के 1,877 में से 1,701 प्रकरणों का निराकरण किया गया।

विशेष मॉनिटरिंग से मिली गति

जिला प्रशासन द्वारा राजस्व प्रकरणों के निराकरण की नियमित समीक्षा की गई। समय-सीमा की प्रत्येक बैठक में लंबित एवं विवादित प्रकरणों की स्थिति की समीक्षा कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। आवश्यकतानुसार कलेक्टर द्वारा समय-समय पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। मैदानी अमले की सक्रियता तथा पंचायत स्तर पर समन्वित प्रयासों के परिणामस्वरूप राजस्व सेवाओं के निराकरण में तेजी आई है।

प्रशासन का संकल्प-समयबद्ध और नागरिक केंद्रित राजस्व सेवाएं

राजस्व वर्ष 2026 में जिला प्रशासन की प्राथमिकता विवादित नामांतरण एवं खाता विभाजन जैसे जटिल प्रकरणों का त्वरित एवं पारदर्शी निराकरण रही। वर्ष 2025 की तुलना में विवादित नामांतरण की निराकरण दर 68.49 प्रतिशत से बढ़कर 94.82 प्रतिशत तथा विवादित खाता विभाजन की निराकरण दर 72.53 प्रतिशत से बढ़कर 95.70 प्रतिशत होना राजस्व पखवाड़ा, पंचायत स्तर पर आयोजित शिविरों, मैदानी अमले की सक्रियता एवं सतत मॉनिटरिंग के समन्वित प्रयासों का परिणाम है।

जिला प्रशासन द्वारा आगे भी राजस्व सेवाओं को सरल, सुलभ, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने तथा आम नागरिकों को उनके गांव एवं पंचायत स्तर पर अधिकाधिक सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।

राजस्व वर्ष 2026 में प्रकरणों की स्थिति

राजस्व वर्ष 2026 में 1 अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026 तक राजनांदगांव जिले में राजस्व अमले द्वारा विभिन्न प्रकार के प्रकरणों का निराकरण किया गया। इस अवधि में कुल 37,306 राजस्व प्रकरण दर्ज हुए, जिनमें से 34,939 प्रकरणों का निराकरण किया गया, जबकि 2,367 प्रकरण लंबित हैं। कुल निराकरण दर 93.66 प्रतिशत रही।

इनमें अविवादित नामांतरण के 25,150 प्रकरणों में से 23,343 का निराकरण किया गया, जबकि 1,807 प्रकरण लंबित हैं। अविवादित खाता विभाजन के 3,254 प्रकरणों में से 3,062 का निराकरण हुआ और 192 मामले लंबित हैं। विवादित नामांतरण के 2,241 प्रकरणों में से 2,125 का निराकरण किया गया, जबकि 116 प्रकरण लंबित हैं। इसी तरह विवादित खाता विभाजन के 768 मामलों में से 735 का निराकरण हुआ और 33 मामले लंबित हैं।

सीमांकन के 2,333 प्रकरणों में से 2,331 का निराकरण किया गया, जबकि केवल 2 प्रकरण लंबित हैं। व्यपवर्तन (ऑटो-डायवर्शन) के 1,632 मामलों में से 1,591 का निराकरण हुआ और 41 मामले लंबित हैं। वहीं वृक्ष कटाई की अनुमति से जुड़े सभी 51 प्रकरणों का 100 प्रतिशत निराकरण किया गया। इसके अलावा भू-अभिलेख प्रविष्टि सुधार के 1,877 प्रकरणों में से 1,701 का निराकरण किया गया, जबकि 176 प्रकरण लंबित हैं।

पंचायत अमले द्वारा निराकृत प्रकरण

पंचायत अमले द्वारा वर्ष 2026 में कुल 15,496 प्रकरण दर्ज किए गए, जिनमें से 14,694 प्रकरणों का निराकरण किया गया। कुल निराकरण दर 94.82 प्रतिशत रही।

अविवादित नामांतरण के 12,629 प्रकरणों में से 11,887 का निराकरण किया गया, जबकि अविवादित खाता विभाजन के 2,867 प्रकरणों में से 2,807 प्रकरणों का निराकरण हुआ।

प्रशासनिक कार्ययोजना और जनसेवा की गुणवत्ता

  1. जटिल प्रकरणों की विशेष मॉनिटरिंग: विवादित प्रकरणों (नामांतरण एवं खाता विभाजन) के लिए विशेष राजस्व शिविरों एवं नियमित सुनवाइयों का आयोजन किया गया, जिससे वर्षों से लंबित पड़े मामलों का समय-सीमा में निस्तारण संभव हुआ।
  2. सक्रिय मैदानी अमला: तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारियों के साथ-साथ पंचायत स्तर पर सरपंच एवं सचिवों के समन्वय से ग्रामीण क्षेत्रों में विवादित मामलों को आपसी सहमति एवं त्वरित वैधानिक प्रक्रिया से निपटाया गया।
  3. पारदर्शिता एवं सुशासन: प्रकरणों का त्वरित एवं पारदर्शी निराकरण होने से आम जनता को कोर्ट-कचहरी के चक्करों से राहत मिली है और प्रशासन के प्रति जन-विश्वास सुदृढ़ हुआ है।

कलेक्टर ने कही यह बात

कलेक्टर ने कहा कि राजस्व वर्ष 2026 में हमारी विशेष प्राथमिकता विवादित नामांतरण और खाता विभाजन जैसे जटिल प्रकरणों का त्वरित निराकरण करना था। गत वर्ष की तुलना में विवादित नामांतरण की निराकरण दर 68.49 प्रतिशत से बढ़कर 94.82 प्रतिशत और विवादित खाता विभाजन की निराकरण दर 72.53 प्रतिशत से बढ़कर 95.70 प्रतिशत होना हमारे राजस्व एवं पंचायत अमले की निष्ठा और सक्रियता का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

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