सिमडेगा: घने जंगल, हरी-भरी पहाड़ियां, शांत वादियां और जलाशयों की खूबसूरती के लिए पहचाना जाने वाला सिमडेगा अब पर्यटन के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाने की तैयारी में है। हॉकी की नर्सरी के रूप में देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान रखने वाले इस जिले के केलाघाघ डैम को पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की पहल शुरू हो गई है। यहां करीब पांच करोड़ रुपये की लागत से इको रिसॉर्ट विकसित करने की योजना है। राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने पहले चरण में करीब पांच करोड़ रुपये आवंटित करने की अनुशंसा की है। योजना धरातल पर उतरती है तो केलाघाघ डैम की खूबसूरती के साथ पर्यटकों के लिए सुविधाएं भी बढ़ेंगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
घोषणा के बाद तेज हुई इको रिसॉर्ट की प्रक्रिया
केलाघाघ डैम में इको रिसॉर्ट विकसित करने की पहल 20 अक्टूबर 2026 को आयोजित पीटर बाड़ा मेमोरियल हॉकी टूर्नामेंट के दौरान हुई घोषणा के बाद आगे बढ़ी। सिमडेगा के एस्ट्रोटर्फ स्टेडियम में आयोजित टूर्नामेंट में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने डैम में इको रिसॉर्ट निर्माण के लिए राशि उपलब्ध कराने की घोषणा की थी।
इसके बाद 28 अक्टूबर को योजना एवं विकास विभाग ने उपायुक्त, सिमडेगा को पत्र जारी कर प्रस्तावित योजना का प्राक्कलन तैयार करने का निर्देश दिया। अब पहले चरण में करीब पांच करोड़ रुपये आवंटित करने की अनुशंसा के बाद इस परियोजना के आगे बढ़ने की उम्मीद बढ़ी है।
पहाड़ियों और हरियाली से घिरा है केलाघाघ डैम
जिला मुख्यालय से करीब चार से छह किलोमीटर की दूरी पर स्थित केलाघाघ डैम छिंदा नदी पर बना खूबसूरत जलाशय है। चारों ओर ऊंची पहाड़ियों और हरियाली से घिरा यह इलाका अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए पहले से ही पर्यटकों और स्थानीय लोगों को आकर्षित करता है।
डैम का नीला पानी, पहाड़ियों का मनोरम दृश्य और आसपास का शांत वातावरण यहां आने वालों को खास अनुभव देता है। यहां नौका विहार और पैरासेलिंग जैसी गतिविधियों की सुविधा भी उपलब्ध है। डैम के पठार पर विकसित छोटा पार्क इसकी खूबसूरती को और बढ़ाता है।
शहर के नजदीक होने के कारण केलाघाघ डैम स्थानीय लोगों के लिए पिकनिक और सैर-सपाटे की पसंदीदा जगहों में शामिल है।
पर्यटन के साथ शहर की पेयजल जरूरतों में भी अहम भूमिका
केलाघाघ डैम का महत्व सिर्फ पर्यटन तक सीमित नहीं है। यह सिमडेगा जिला मुख्यालय की पेयजल जरूरतों को पूरा करने का भी प्रमुख स्रोत है। सिमडेगा अधिसूचित क्षेत्र समिति इसी डैम से शहर में पेयजल की आपूर्ति करती है।
यानी एक ओर जहां जलाशय शहर की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, वहीं दूसरी ओर इसकी प्राकृतिक खूबसूरती पर्यटन की संभावनाओं को भी मजबूत करती है।
मानसून और सर्दियों में बढ़ जाती है खूबसूरती
केलाघाघ डैम पूरे साल आकर्षण का केंद्र रहता है, लेकिन मानसून और सर्दियों में यहां का नजारा और भी मनमोहक हो जाता है। अक्टूबर से मार्च तक का समय घूमने के लिहाज से बेहतर माना जाता है।
इस दौरान आसपास की हरियाली, पहाड़ियों के बीच फैला जलाशय और शांत वातावरण पर्यटकों को खासा आकर्षित करता है। सूर्यास्त का नजारा भी यहां आने वाले लोगों के लिए खास आकर्षण रहता है।
इको रिसॉर्ट से रोजगार और कारोबार को मिल सकती है रफ्तार
केलाघाघ डैम में इको रिसॉर्ट विकसित होने से सिमडेगा के पर्यटन क्षेत्र को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। बेहतर सुविधाएं विकसित होने पर दूसरे जिलों और राज्यों से भी पर्यटकों के पहुंचने की संभावना बढ़ सकती है।
इसका असर स्थानीय होटल, परिवहन, खानपान और स्थानीय उत्पादों से जुड़े कारोबार पर भी पड़ सकता है। साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि करीब पांच करोड़ रुपये की प्रस्तावित योजना कब तक धरातल पर उतरती है और केलाघाघ डैम को पर्यटन के एक विकसित केंद्र के रूप में नई पहचान मिलती है।

