SIR Madan Rathore Sonia Gandhi: दिल्ली में SIR के विरोध में कांग्रेस के प्रदर्शन के बीच राजस्थान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। मंगलवार को भाजपा मुख्यालय में मीडिया से बातचीत में उन्होंने SIR के जरिए मतदाता सूची के सत्यापन और नागरिकता के सवाल को उठाया। इसी दौरान राठौड़ ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी का जिक्र करते हुए उनकी नागरिकता और मतदाता बनने के समय पर सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि अगर उस समय SIR जैसी प्रक्रिया होती तो सोनिया गांधी मतदाता नहीं बन पातीं।

SIR के विरोध पर कांग्रेस से पूछा सवाल
मदन राठौड़ ने कहा कि विपक्ष चुनाव आयोग के खिलाफ गलत धारणा बनाने की कोशिश कर रहा है। उनके मुताबिक, SIR को लेकर विरोध करने से पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि देश में मतदाता बनने का अधिकार किसे मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिसकी जड़ें देश से जुड़ी हों, जिसका परिवार और पूर्वज इस देश के नागरिक रहे हों और जिसकी निष्ठा देश के प्रति हो, उसी को सरकार चुनने का अधिकार होना चाहिए।
‘देश को धर्मशाला समझने वालों को वोट का अधिकार नहीं’
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि बाहर से आया कोई व्यक्ति अगर भारत को केवल अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करता है और देश को धर्मशाला की तरह समझता है तो उसे भारत की सरकार चुनने का अधिकार नहीं दिया जा सकता।
उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति भारत के हित को अपना हित नहीं मानता और जिसकी निष्ठा देश के प्रति नहीं है, उसे मताधिकार दिए जाने पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सोनिया गांधी की नागरिकता को लेकर क्या बोले राठौड़?
राठौड़ ने सोनिया गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि वह भारत की नागरिक बाद में बनीं, जबकि मतदाता पहले बन गई थीं। उन्होंने दावा किया कि राजीव गांधी से विवाह के बाद सोनिया गांधी भारतीय नागरिक बनीं, लेकिन उससे पहले ही उनका नाम मतदाता सूची में शामिल होने का सवाल सामने आया।
राठौड़ के मुताबिक, अगर उस समय SIR जैसी प्रक्रिया लागू होती तो सोनिया गांधी मतदाता नहीं बन पातीं, क्योंकि उनके अनुसार मतदाता बनने के लिए भारतीय नागरिक होना जरूरी है।
यह बयान भाजपा नेता की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप के रूप में सामने आया है। सोनिया गांधी की नागरिकता और मतदाता सूची में नाम शामिल होने से जुड़े इस दावे पर अंतिम तथ्यात्मक निष्कर्ष संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और कानूनी प्रावधानों के आधार पर ही तय होंगे।
SIR को लेकर भाजपा का तर्क क्या है?
राठौड़ ने कहा कि SIR का विरोध करने वालों को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि मतदाता कौन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो भारत को अपनी मातृभूमि और पितृभूमि मानता है और देश के प्रति निष्ठा रखता है, उसे वोट देने का अधिकार होना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि अगर SIR के जरिए यही सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है तो इसका विरोध क्यों किया जा रहा है।
फॉर्म-6 और वोटर लिस्ट पर भी बात
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि फॉर्म-6 या मतदाता सूची में नाम जोड़ने जैसी तकनीकी प्रक्रियाओं पर फैसला चुनाव आयोग करेगा। लेकिन देश की सरकार कौन चुनेगा, यह अधिकार देश के नागरिकों का है।
उन्होंने कहा कि भारत की सरकार का चुनाव भारत के नागरिक ही करेंगे। किसी दूसरे देश के नागरिक के अधिकार या वहां की राजनीतिक व्यवस्था का निर्णय भारत से नहीं किया जा सकता।
दिल्ली में कांग्रेस के प्रदर्शन के बीच बढ़ी सियासी बहस
SIR को लेकर दिल्ली में कांग्रेस और विपक्षी दलों का विरोध जारी है। इसी बीच भाजपा की ओर से मतदाता सूची के सत्यापन और पात्रता को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।
राजस्थान भाजपा अध्यक्ष का ताजा बयान इसी राजनीतिक बहस का हिस्सा है, जिसमें उन्होंने SIR को सोनिया गांधी की नागरिकता और मतदाता बनने के मुद्दे से जोड़कर कांग्रेस पर निशाना साधा है।
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