परिवहन विभाग, यातायात पुलिस और यूपीडा ने पूर्वांचल और लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर 12 घंटे का संयुक्त जांच अभियान चलाया. इस दौरान सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाली कई बसों को सीज किया गया और कई के चालान काटे गए.

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर शनिवार रात स्लीपर बसों की सुरक्षा जांच के लिए परिवहन विभाग, यातायात पुलिस और यूपीडा ने संयुक्त अभियान चलाया. 12 घंटे तक चले इस अभियान में एक्सप्रेसवे के प्रवेश और निकास बिंदुओं पर बसों की जांच की गई. सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाली कई बसों को सीज किया गया, जबकि कई के चालान काटे गए.

20 टीमें तैनात

अपर परिवहन आयुक्त प्रवर्तन केडी सिंह गौर ने बताया कि अभियान के लिए दोनों एक्सप्रेसवे के एंट्री और एग्जिट प्वॉइंट पर 20 प्रवर्तन टीमें लगाई गई थीं. जांच दो शिफ्टों में हुई. पहली शिफ्ट शाम 7 बजे से रात 1 बजे तक और दूसरी रात 1 बजे से सुबह 7 बजे तक चली.

इस व्यवस्था का उद्देश्य एक्सप्रेसवे से गुजरने वाली सभी स्लीपर बसों की जांच करना था. अधिकारियों के मुताबिक, नियमों का उल्लंघन करने वाली बसों पर कार्रवाई जारी है. चालान और सीज की गई बसों की कुल संख्या का आंकड़ा संकलित होने के बाद इसकी जानकारी दी जाएगी.

इन मानकों की हुई जांच

अभियान में यात्री सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बस बॉडी कोड के पालन की जांच की गई. इसके साथ ही बसों में निर्धारित संख्या से अधिक स्लीपर या सीटें लगाए जाने, आपातकालीन निकास के काम करने की स्थिति और अग्निशमन उपकरणों की कार्यशीलता को भी परखा गया.

जांच के दौरान चालकों के नशे में होने की भी पड़ताल की गई. नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित बसों के चालान काटने और उन्हें बंद करने की कार्रवाई की जा रही है.

हादसों के बाद सख्ती

स्लीपर बसों में आग लगने और पलटने की घटनाओं में यात्रियों की मौत और बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने के मामले सामने आते रहे हैं. परिवहन विभाग ऐसे वाहनों के खिलाफ अभियान चलाने के साथ बस संचालकों और वाहन मालिकों को सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूक भी कर रहा है.

इसके बावजूद नियमों के पालन को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं. इसी के मद्देनजर एक्सप्रेसवे के प्रवेश और निकास बिंदुओं पर विशेष जांच अभियान चलाया गया.