रांची। रांची सदर अस्पताल समेत जिले के सभी निचले क्रम के सरकारी अस्पतालों में पत्रकारों के प्रवेश और रिपोर्टिंग को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। सिविल सर्जन डॉ. अमरेंद्र प्रसाद ने मरीजों की निजता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 11 बिंदुओं की गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत आईसीयू-एचडीयू, एसएनसीयू, इमरजेंसी, ओटी, लेबर रूम, प्रोसिड्योर रूम और नर्सिंग एरिया को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया गया है।
अनुमति के बाद ही अस्पताल में रिपोर्टिंग
नई व्यवस्था के तहत किसी भी पत्रकार या मीडिया प्रतिनिधि को अस्पताल परिसर में रिपोर्टिंग, फोटो या वीडियो बनाने से पहले अस्पताल प्रबंधन से अनुमति लेनी होगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मरीजों की गोपनीयता और गरिमा से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जाएगा।
मरीज की तस्वीर, वीडियो या पहचान सार्वजनिक करने के लिए भी निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। बिना अनुमति अस्पताल परिसर में फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और लाइव स्ट्रीमिंग पर रोक रहेगी।
संवेदनशील क्षेत्रों में मीडिया की एंट्री प्रतिबंधित
अस्पताल के ऐसे सभी हिस्से, जहां मरीजों की सुरक्षा और उपचार प्रक्रिया सीधे जुड़ी है, अब मीडिया के लिए प्रतिबंधित रहेंगे। इनमें आईसीयू, एचडीयू, एसएनसीयू, इमरजेंसी, ऑपरेशन थिएटर, लेबर रूम, प्रोसिड्योर रूम और नर्सिंग एरिया शामिल हैं।अस्पताल में भर्ती मरीज के साथ निर्धारित समय में केवल एक अटेंडेंट को प्रवेश की अनुमति होगी। हालांकि, विशेष परिस्थितियों में संबंधित आदेश में बदलाव किया जा सकता है।
मरीजों की निजता को लेकर उठे थे सवाल
बताया गया है कि 17 अगस्त को सोशल एक्टिविस्ट ज्योति शर्मा ने अस्पताल प्रबंधन को पत्र लिखकर मरीजों की सुरक्षा और निजता से जुड़े मुद्दे उठाए थे। पत्र में आईसीयू और एचडीयू जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोगों के प्रवेश पर सवाल उठाए गए थे।
इसके कुछ दिन बाद अस्पताल प्रशासन ने मीडिया कर्मियों के लिए स्पष्ट नियम जारी कर दिए। प्रशासन का कहना है कि अस्पताल में इलाज करा रहे मरीजों और उनके परिजनों की निजता सर्वोच्च प्राथमिकता है।
छात्र आंदोलन के दौरान बढ़ी थी भीड़
बताया जा रहा है कि हाल के छात्र आंदोलन के दौरान अस्पताल में भर्ती मरीजों की कवरेज के लिए बड़ी संख्या में मीडिया कर्मी पहुंचे थे। इसके अलावा सुरक्षाबलों और छात्रों के समर्थकों की भी अस्पताल परिसर में भीड़ जुटी थी। बिना अनुमति प्रवेश और भीड़ के कारण मरीजों को हुई असुविधा को भी नए नियमों की एक वजह माना जा रहा है।
पत्रकार के खिलाफ FIR के बाद बढ़ी सख्ती
मीडिया रिपोर्टिंग को लेकर पत्रकार आकाश चोपड़ा के खिलाफ दर्ज एफआईआर के बाद अस्पताल प्रशासन की सख्ती से भी इस फैसले को जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों में मरीजों की सुरक्षा और निजता को मुख्य आधार बताया गया है।
इस व्यवस्था के बाद अस्पताल प्रशासन के सामने मरीजों की निजता और सुरक्षा के साथ पत्रकारों के स्वतंत्र रिपोर्टिंग अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी रहेगी।
अस्पताल प्रबंधन की भी तय हुई जिम्मेदारी
नए दिशा-निर्देशों में अस्पताल प्रबंधन के लिए भी कई जिम्मेदारियां तय की गई हैं। इसके तहत—
0 विजिटर और अटेंडेंट पॉलिसी को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना होगा।
0 प्रतिबंधित क्षेत्रों में ‘नो एंट्री’ और ‘ओनली वन अटेंडेंट’ जैसे बोर्ड लगाने होंगे।
0 वेटिंग और विजिटर एरिया को स्पष्ट रूप से चिन्हित करना होगा।
0 इमरजेंसी और एंबुलेंस मार्ग पर किसी तरह का अवरोध नहीं होना चाहिए।
0 सुरक्षा कर्मचारियों और संबंधित स्टाफ की नियमित ब्रीफिंग करनी होगी।
0 नियमों की जानकारी सुरक्षा कर्मियों, अस्पताल कर्मचारियों और चिकित्सकों को देना अनिवार्य होगा।
नियम तोड़ने पर हो सकती है कार्रवाई
अस्पताल प्रशासन ने मीडिया कर्मियों से नए नियमों का कड़ाई से पालन करने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि मरीजों, उनके परिजनों और इलाज की प्रक्रिया की निजता से समझौता नहीं किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।


