Business Desk – धान की पराली को अक्सर किसान बेकार समझकर जला देते हैं, लेकिन यही पराली कमाई का जरिया बन सकती है। हरियाणा के सिरसा की संजना और राजस्थान के भादरा की सोनिका कृषि अपशिष्ट से ईंधन बनाने वाले पेलेट तैयार कर रही हैं। सोनिका ने 2024 में अपना कारोबार शुरू करने के लिए कृषि अवसंरचना कोष से 2.5 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता ली। उनकी इकाई में 20 से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है।

इस कारोबार में पराली के अलावा सरसों के डंठल, मूंगफली के छिलके और गन्ने की खोई का भी इस्तेमाल होता है। इनसे बने पेलेट का उपयोग औद्योगिक भट्टियों और बॉयलर में ईंधन के तौर पर किया जा सकता है। सही कच्चा माल, मशीन और खरीदार मिल जाएं तो यह कारोबार शुरू किया जा सकता है।
पेलेट क्या हैं और इनकी मांग क्यों है?
पेलेट कृषि अपशिष्ट को छोटे, ठोस टुकड़ों में दबाकर बनाए जाते हैं। इन्हें संभालना, रखना और ईंधन के रूप में इस्तेमाल करना आसान होता है। उद्योगों में इनका उपयोग कोयले के विकल्प के तौर पर किया जा सकता है। हालांकि, मांग आपके इलाके में मौजूद उद्योगों, ईंधन की कीमत और पेलेट की गुणवत्ता पर निर्भर करेगी।
कारोबार शुरू करने के लिए क्या करना होगा?
सबसे पहले अपने इलाके में पेलेट खरीदने वाले उद्योगों, बॉयलर संचालकों और अन्य संभावित ग्राहकों का पता लगाएं। उनसे यह जानकारी लें कि उन्हें हर महीने कितने पेलेट चाहिए, किस गुणवत्ता के चाहिए और वे किस कीमत पर खरीदेंगे। इसके बाद ही फैक्ट्री की क्षमता और निवेश तय करें।
फैक्ट्री के लिए उपयुक्त जगह, बिजली, कच्चा माल रखने की जगह और माल लाने-ले जाने की व्यवस्था जरूरी है। मशीन खरीदने से पहले कारोबार की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) बनवाएं। इसमें मशीनों की लागत, बिजली, मजदूरी, परिवहन, रखरखाव और संभावित बिक्री का हिसाब शामिल करें।
कौन-कौन सी मशीनें लगेंगी?
पराली से पेलेट बनाने के लिए आम तौर पर पराली काटने वाली मशीन, ग्राइंडर, जरूरत के अनुसार सुखाने की मशीन, पेलेट बनाने की मशीन, ठंडा करने और छंटाई की व्यवस्था तथा पैकिंग मशीन की जरूरत पड़ती है। मशीनों का चुनाव कच्चे माल की नमी, फैक्ट्री की क्षमता और तैयार उत्पाद की जरूरत के अनुसार करें।
फैक्ट्री लगाने में कितना खर्च आएगा?
मशीनों की कीमत क्षमता और निर्माता के अनुसार बदलती है। शुरुआती अनुमान के तौर पर मशीनों पर करीब 25 लाख से 1.10 करोड़ रुपए तक खर्च हो सकता है। वहीं, लगभग एक टन प्रति घंटे की क्षमता वाली पूरी इकाई लगाने की लागत करीब 1.10 करोड़ से 1.50 करोड़ रुपए तक हो सकती है। ये अनुमानित आंकड़े हैं, पक्के बाजार भाव नहीं। जमीन, भवन, बिजली कनेक्शन, परिवहन और कार्यशील पूंजी के कारण कुल खर्च बढ़ सकता है।
पराली कहां से खरीदें?
कच्चा माल किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO), सहकारी समितियों और पराली की गांठ बनाने वाले ठेकेदारों से खरीदा जा सकता है। किसानों से पहले ही बात कर लें कि पराली कौन काटेगा, गांठ कौन बनाएगा और उसे फैक्ट्री तक कौन पहुंचाएगा। इन खर्चों का हिसाब खरीद की कीमत में शामिल करें।
एक ऑनलाइन उपलब्ध उदाहरण में पराली की कीमत करीब 2,330 रुपए प्रति टन बताई गई थी। इसे पूरे देश का तय भाव न मानें। कीमत मौसम, जगह, नमी, उपलब्धता और परिवहन के खर्च के अनुसार बदल सकती है।
पेलेट कहां बेचें और कितनी कमाई हो सकती है?
संभावित ग्राहक औद्योगिक इकाइयां, बॉयलर संचालक और दूसरे ऐसे उद्योग हो सकते हैं, जिन्हें ठोस ईंधन की जरूरत होती है। उत्पादन शुरू करने से पहले खरीदारों से बात करना बेहतर है। पेलेट की कीमत गुणवत्ता, नमी, राख की मात्रा, परिवहन और स्थानीय मांग पर निर्भर करती है।
एक प्रकाशित बाजार अनुमान में पेलेट की कीमत 6,000 से 9,000 रुपए प्रति टन तक बताई गई थी। यह हर जगह मिलने वाला तय भाव नहीं है।
उदाहरण के लिए, यदि एक टन प्रति घंटे की क्षमता वाली इकाई रोज 8 घंटे और महीने में 25 दिन चलती है, तो इसकी सैद्धांतिक उत्पादन क्षमता 200 टन प्रति माह होगी। अगर पूरा उत्पादन 8,500 रुपए प्रति टन की दर से बिकता है, तो महीने की बिक्री 17 लाख रुपए होगी।
यदि उत्पादन की परिवर्तनीय लागत 7,000 रुपए प्रति टन मानें, तो 200 टन पर 14 लाख रुपए खर्च होंगे और 3 लाख रुपए बचेंगे। लेकिन यह शुद्ध मुनाफा नहीं है। इसमें से किराया, ब्याज, मशीनों का मूल्य घटने का खर्च, कर और अन्य स्थायी खर्च घटाने होंगे। वास्तविक कमाई उत्पादन, बिक्री और लागत पर निर्भर करेगी।
सरकारी मदद कैसे मिल सकती है?
कृषि अवसंरचना कोष (Agriculture Infrastructure Fund) के तहत पात्र परियोजनाओं को वित्तीय सहायता से जुड़ी सुविधाएं मिल सकती हैं। सोनिका ने 2024 में इसी कोष से 2.5 करोड़ रुपए की सहायता लेकर कारोबार शुरू किया था। हालांकि, हर पेलेट फैक्ट्री को इतनी राशि मिलना तय नहीं है। पात्रता, परियोजना और मौजूदा नियमों के आधार पर सहायता तय होती है।
योजना की जानकारी के लिए कृषि अवसंरचना कोष की आधिकारिक वेबसाइट देखें। जैव ऊर्जा और बायोमास से जुड़ी योजनाओं के लिए नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की वेबसाइट पर भी जानकारी ली जा सकती है। आवेदन से पहले योजना की मौजूदा शर्तें और उपलब्ध सहायता जरूर जांचें।
कारोबार शुरू करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
पराली से पेलेट बनाने का कारोबार शुरू करने से पहले तीन बातें तय कर लें—कच्चा माल कितनी मात्रा में और किस कीमत पर मिलेगा, तैयार पेलेट कौन खरीदेगा और उत्पादन की वास्तविक लागत कितनी होगी। केवल मशीन खरीद लेना पर्याप्त नहीं है। नियमित आपूर्ति, गुणवत्ता और खरीदारों के साथ समझौता कारोबार को टिकाऊ बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

