कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। देश में चीनी के बढ़ते दामों के बीच केंद्र सरकार की एथनॉल नीति को लेकर कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। हरियाणा कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार ने घरेलू जरूरत और चीनी की उपलब्धता का संतुलन बनाए रखने के बजाय गन्ने के एक बड़े हिस्से को एथनॉल उत्पादन की ओर मोड़ने तथा चीनी के निर्यात को बढ़ावा देने पर जोर दिया। अब बाजार में आपूर्ति का दबाव बढ़ने के बाद सरकार को विदेश से चीनी मंगाने की जरूरत पड़ रही है।
कांग्रेस का कहना है कि मौजूदा स्थिति सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करती है।
पार्टी के मुताबिक, जब देश में चीनी की उपलब्धता को लेकर दबाव बनने लगा था, तब घरेलू बाजार की जरूरत को देखते हुए समय रहते कदम उठाए जाने चाहिए थे। इसके विपरीत एथनॉल उत्पादन बढ़ाने की नीति को आगे बढ़ाया गया।
पार्टी ने करीब 10 लाख टन चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की संभावित जरूरत को केंद्र सरकार की नीति की विफलता से जोड़ते हुए सवाल उठाया है। कांग्रेस का तर्क है कि एथनॉल के जरिए विदेशी मुद्रा बचाने के दावे किए गए, लेकिन अब घरेलू मांग पूरी करने के लिए विदेशी चीनी पर निर्भरता की स्थिति बन रही है।
हरियाणा कांग्रेस ने दावा किया कि चीनी के दाम बढ़ने का सीधा असर आम उपभोक्ता की जेब पर पड़ रहा है। पार्टी ने केंद्र से चीनी और एथनॉल के बीच संतुलन को लेकर अपनी नीति स्पष्ट करने की मांग की है।
हालांकि, चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे उत्पादन, स्टॉक और बाजार की मांग समेत कई कारक होते हैं। ऐसे में एथनॉल नीति को ही कीमत बढ़ने की एकमात्र वजह नहीं माना जा सकता।
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