Supreme Court CJI Surya Kant On Form 6: चुनाव वोटर लिस्ट (voter list) के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी एसआईआर (SIR) को लेकर पूरे देश में जारी प्रदर्शनों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और एसआईआर रद्द करने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान SIR प्रक्रिया के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हमने मॉडिफाइड फॉर्म 6 को मंजूरी नहीं दी थी। CJI ने कहा कि बिना मेरी अनुमति के गैरकानूनी काम हुआ है तो नतीजे भुगतने पड़ेंगे।
बता दें कि SIR प्रक्रिया के लिए फॉर्म-6 में बदलाव कर उसके साथ एक घोषणापत्र को जोड़ा गया है। इसमें मतदाताओं से दो अतिरिक्त जानकारी मांगी गई है।
देश के शीर्ष न्यायालय ने यह स्पष्टीकरण तब दिया है, जब कोर्ट को SIR प्रक्रिया के तहत फ़ॉर्म 6 में किए गए बदलावों के बारे में बताया गया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहनाकी बेंच ने साफ़ किया कि उसने ऐसे किसी बदलाव को मंज़ूरी नहीं दी है। कोर्ट ने कहा कि हमने फ़ॉर्म 6 में बदलावों को मंज़ूरी नहीं दी है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट यह पता लगाने के लिए रिकॉर्ड की जांच करना चाहता है कि बदलाव किसने किए? उन्होंने कहा कि संशोधित फॉर्म 6 को हमने मंजूरी नहीं दी है, यह बात बिल्कुल साफ होनी चाहिए।
हमने फॉर्म-6 में बदलाव को मंजूरी नहीं दी है
मामले की सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि कि यह चुनौती एक राष्ट्रीय संस्था के तौर पर चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़ी है। वे CEC के कामकाज पर सवाल उठाने वाली अपनी दलीलों पर कायम हैं। उन्होंने कहा कि हम इस देश में निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनावों के माहौल में बड़े हुए हैं। आज वैसी स्थिति नहीं है। इसपर CJI सूर्यकांत ने कहा कि हम भी अपना होमवर्क करते हैं। हमें भी मामले की जानकारी है। सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने आगे कहा कि हाल ही में दिल्ली से जुड़ा मामला है। दिल्ली में SIR कैसे किया गया। फ़ॉर्म 6 में दो नई शर्तें जोड़ी गई। बदला हुआ फ़ॉर्म 6 जारी किया गया था। इसके बाद CJI ने कहा कि कृपया ध्यान दें कि हमने किसी भी बदले हुए फ़ॉर्म 6 को मंज़ूरी नहीं दी है। चीफ जस्टिस ने कहा है कि अगर कोई गैर-कानूनी काम हुआ है, तो उसके नतीजे भी भुगतने होंगे।
फॉर्म-6 में क्या बदलाव हुआ है
बता दें कि फॉर्म 6 का विवाद चुनाव आयोग के एक अतिरिक्त SIR डिक्लेरेशन से जुड़ा है, जिसमें नए वोटरों को पुरानी वोटर लिस्ट से लिंक देने की ज़रूरत होती है। चुनाव आयोग का कहना था कि यह सिर्फ़ एक एनेक्शर है, जबकि आलोचकों का तर्क था कि इसने तय कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना असल में एक कानूनी फॉर्म को बदल दिया गया।
कॉकरोच जनता पार्टी की भी आई प्रतिक्रिया
मॉडिफाइड फॉर्म 6 को मंजूरी नहीं देने पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद इसपर कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। सीजेपी के सौरव दास ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा- यह बहुत बड़ी बात है! आज सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार के एक गैर-कानूनी काम से खुद को अलग कर लिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा है कि कोर्ट ने Form 6 (नए वोटर्स के रजिस्ट्रेशन का फॉर्म) में किसी भी बदलाव को मंज़ूरी नहीं दी है। याद रखें कि दूसरे दो इलेक्शन कमिश्नरों ने Form में बदलाव पर एतराज़ जताया था, जिसके बारे में उनका कहना था कि इससे नए वोटर्स, खासकर Gen Z को “हैरेसमेंट” हो रहा है, जिन्हें रजिस्टर्ड वोटर बनने से रोका जा रहा है। Form को कानून और इलेक्शन नियमों में बदलाव के बाद ही बदला जा सकता है।
सौरभ ने आगे लिखा- ज़्यादा चिंता की बात यह है कि इंडियन एक्सप्रेस में ज्ञानू के खुलासे के ठीक एक दिन बाद, चुनाव आयोग की 26 सितंबर की प्रेस रिलीज़ में कहा गया कि “SIR के लिए फॉर्म 6 के साथ अटैच घोषणा को SC ने सही ठहराया है”। लेकिन आज, CJI सूर्यकांत ने कहा है नहीं! जिस कोर्ट ने ज्ञानू की SIR प्रक्रिया को कानूनी कवर दिया था, उसने हाथ खड़े कर दिए हैं और कहा है कि ज्ञानू के गैर-कानूनी काम से उनका कोई लेना-देना नहीं है! ज्ञानू के लिए समय निकलता जा रहा है! ज्ञानू, हो गया भाई।
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