रांची: सरकारी और गैरमजरूआ जमीन की कथित अवैध रजिस्ट्री के मामले में शिवशंकर शर्मा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर दी है। साथ ही याचिकाकर्ता पर 25 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने जुर्माने की राशि चार सप्ताह के भीतर सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन में जमा कराने का निर्देश दिया है।

जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने मामले की सुनवाई की। पीठ ने कहा कि झारखंड हाईकोर्ट ने जनहित याचिका खारिज करने और याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का उचित निर्णय लिया था। हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी खारिज कर दी। हालांकि, कोर्ट ने याचिका दायर करने में हुई देरी को माफ करते हुए मामले की सुनवाई की।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला झारखंड हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका (WPPIL संख्या 689/2021) से जुड़ा है। याचिकाकर्ता शिवशंकर शर्मा ने आरोप लगाया था कि राज्य में सरकारी और गैरमजरूआ जमीन, जिसकी बिक्री की अनुमति नहीं है, उसकी रजिस्ट्री की जा रही है। इसके साथ ही ऐसी जमीनों का दाखिल-खारिज भी किया जा रहा है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि इस पूरे मामले में अंचल अधिकारियों (CO), रजिस्ट्रार समेत सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत है।

याचिकाकर्ता ने पूरे मामले की जांच कराने की मांग की थी। हालांकि, तत्कालीन चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव की अध्यक्षतावाली खंडपीठ ने 9 मई 2025 को जनहित याचिका खारिज कर दी थी और याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था।

सबूतों के अभाव में हाईकोर्ट ने खारिज की थी याचिका

झारखंड हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि याचिकाकर्ता ने आरोपों को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत या तथ्य पेश नहीं किया है। इसी आधार पर अदालत ने जनहित याचिका खारिज करते हुए जुर्माना लगाया था।

इसके बाद शिवशंकर शर्मा ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिलने के बाद उनकी याचिका खारिज हो गई है। साथ ही उन पर 25 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया गया है।