पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बिगड़ती सेहत को लेकर सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को अदालत ने आदेश दिया कि इमरान खान को 48 घंटे के भीतर शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में इलाज के लिए ट्रांसफर किया जाए। साथ ही उनकी स्वास्थ्य स्थिति की विस्तृत जांच के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों का मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया गया है।
मेडिकल रिपोर्ट को लेकर कोर्ट नाराज
तीन जजों की बेंच की अध्यक्षता जस्टिस शाहिद वहीद ने की। सुनवाई के दौरान अदालत ने अडियाला जेल प्रशासन से इमरान खान की पूरी मेडिकल रिपोर्ट मांगी। कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि पूरी रिपोर्ट देने के बजाय केवल मेडिकल समरी पेश की गई।
रिपोर्ट के अनुसार, इमरान के ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव, तेज धड़कन और मानसिक तनाव की समस्या सामने आई है। हालिया जांच में उनका ब्लड प्रेशर 140/80 और नब्ज 54 प्रति मिनट दर्ज की गई।
आंख की बीमारी का भी जिक्र
जेल की मेडिकल रिपोर्ट में इमरान खान को Central Retinal Vein Occlusion (CRVO) नाम की आंख की बीमारी होने का भी उल्लेख है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसका इलाज जारी है और प्रभावित आंख की दृष्टि में सुधार हुआ है। रिपोर्ट में नवंबर 2023 से अगस्त 2026 तक हुई 39 मेडिकल जांचों का भी जिक्र किया गया है।
बहनों से मुलाकात को बताया मौलिक अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान की बहनों से मुलाकात के मुद्दे पर भी सवाल उठाए। जस्टिस शाहिद वहीद ने कहा कि परिवार से मुलाकात कराना कोई एहसान नहीं, बल्कि उनका मौलिक अधिकार है।
अदालत ने पिछले तीन वर्षों में इमरान और उनकी बहनों के बीच हुई मुलाकातों का रिकॉर्ड मांगा है। इसके अलावा उनके बेटों से बातचीत और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जानकारी भी पेश करने को कहा गया है।
मेडिकल बोर्ड में बहन और निजी डॉक्टर भी शामिल
कोर्ट ने इमरान की बहन डॉ. उजमा खान और उनके निजी डॉक्टर को मेडिकल बोर्ड में शामिल करने का निर्देश दिया है। बोर्ड उनकी पुरानी मेडिकल रिपोर्टों की समीक्षा कर यह तय करेगा कि उन्हें किस तरह के इलाज की जरूरत है और उपचार जेल में संभव है या अस्पताल में भर्ती करना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) से भी इमरान की स्वास्थ्य स्थिति को राजनीतिक मुद्दा न बनाने की अपील की है।
अगस्त 2023 से जेल में हैं इमरान
73 वर्षीय इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। उन्हें शुरुआत में तोशाखाना मामले में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद सिफर, अल-कादिर ट्रस्ट और इद्दत निकाह समेत कई मामलों में कानूनी कार्रवाई हुई। इमरान और PTI इन मामलों को राजनीतिक प्रतिशोध बताते रहे हैं, जबकि पाकिस्तान सरकार और जांच एजेंसियां आरोपों को खारिज करते हुए इन्हें कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताती हैं।
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