भुवनेश्वर: ओडिशा के पूर्व कानून मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता नरसिंह मिश्रा ने केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए ‘खान एवं खनिज विकास और विनियमन’ (MMDR) संशोधन विधेयक पर बड़ा हमला बोला है। संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मिश्रा ने दावा किया कि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान सर्वोच्च न्यायालय इस विवादित विधेयक को खारिज कर देगा।

कांग्रेस द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने जानकारी दी कि इस विधेयक को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में याचिका दायर की जा चुकी है और सुप्रीम कोर्ट ने इसे सुनवाई के लिए स्वीकार भी कर लिया है। नरसिंह मिश्रा ने अतीत के कानूनी घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री जानकी वल्लभ पटनायक के कार्यकाल के दौरान राज्य सरकार ने ‘ओडिशा सेस एक्ट'(Odisha Cess Act) लागू किया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि राज्य के पास ऐसा उपकर लगाने का संवैधानिक अधिकार नहीं है।

पूर्व मंत्री ने बीजू पटनायक सरकार के समय के अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा, “जब बीजू पटनायक मुख्यमंत्री थे, तब मैं कानून मंत्री था। उस समय मुझे खनिज-समृद्ध भूमि पर कर लगाने के लिए एक विधेयक का प्रारूप तैयार करने को कहा गया था। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य सरकार को उन जमीनों पर टैक्स वसूलने में सक्षम बनाना था जहां प्राकृतिक खनिज संसाधन मौजूद हैं।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि वह प्रस्तावित कानून सीधे खनिजों पर टैक्स लगाने के बजाय केवल खनिज युक्त भूमि पर कर लगाने के रूप में तैयार किया गया था। यद्यपि मामला शीर्ष अदालत में गया और राज्य केस हार गया, लेकिन बाद में 15 जनवरी 2004 को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार किया कि भूमि पर राज्य सरकार का अधिकार है।

नरसिंह मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि यदि ऐसे कानूनों को सही तरीके से लागू किया जाए तो ओडिशा राज्य को हर साल लगभग ₹12,000 करोड़ का राजस्व प्राप्त हो सकता है। इसके अलावा, टाटा स्टील द्वारा किए गए एक अध्ययन का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार के उपक्रमों पर राज्य सरकार का लगभग ₹17,000 करोड़ बकाया है।

सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले से साफ हो गया है कि राज्य सरकारों के पास खनिज-समृद्ध भूमि पर कर लगाने का अधिकार है और बकाये की वसूली उस तारीख से की जानी चाहिए जब से वह देय हुआ था। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया था कि उसे इस राशि का भुगतान किश्तों में करने की अनुमति दी जाए, क्योंकि एकमुश्त भुगतान से केंद्रीय खजाने पर अत्यधिक वित्तीय बोझ पड़ेगा। मिश्रा ने आरोप लगाया कि केंद्र को कर चुकाना था और राज्य को इसकी मांग करनी चाहिए थी, लेकिन मांग न किए जाने के कारण ओडिशा को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।

संवाददाता सम्मेलन में मौजूद ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद धर्मेंद्र प्रधान पर तीखा हमला बोला। भक्त चरण दास ने सवाल उठाया कि पिछले 12 वर्षों में कथित तौर पर कितने मिलियन टन कोयला और लौह अयस्क का अवैध उत्खनन हुआ और उसका लाभ किसको मिला। इसके साथ ही उन्होंने तीन अन्य ज्वलंत सवाल उठाते हुए धर्मेंद्र प्रधान और भारतीय जनता पार्टी को इस पर सार्वजनिक रूप से अपना रुख स्पष्ट करने की चुनौती दी।

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