Surajgarh Panchayat Election: राजस्थान के झुंझुनूं जिले में सूरजगढ़ पंचायत समिति के वार्ड 7 से पंचायत चुनाव लड़ने पहुंचे कांग्रेस विधायक श्रवण के बेटे जयप्रकाश का नामांकन निरस्त कर दिया गया।

आरोप है कि मतदाता सूची में नाम जुड़वाने और नामांकन स्वीकार कराने के लिए उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश की एक कॉपी एसडीएम कार्यालय भेजी थी। निर्वाचन आयोग ने आदेश की सत्यापित प्रति मांगी, लेकिन वह उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद नामांकन खारिज कर दिया गया।

नगर पालिका की मतदाता सूची में था नाम

जयप्रकाश का नाम सूरजगढ़ नगर पालिका के वार्ड 25 की मतदाता सूची में दर्ज है। वह पंचायत चुनाव लड़ने के लिए जीणी पंचायत की मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने आवेदन किया था। नियमों के मुताबिक, चुनाव की अधिसूचना जारी होने से 10 दिन पहले तक ही मतदाता सूची में नाम जोड़ा जा सकता था। समयसीमा निकल जाने के कारण बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) ने उनका नाम जोड़ने से मना कर दिया।

हाईकोर्ट में याचिका, अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को

मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए जयप्रकाश ने 15 अक्टूबर को हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। 16 अक्टूबर को मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 27 अक्टूबर की तारीख तय कर दी। इसी दिन जयप्रकाश सूरजगढ़ एसडीएम कार्यालय में पंचायत समिति के वार्ड 7 से नामांकन दाखिल करने पहुंचे। आरोप है कि इस दौरान हाईकोर्ट के आदेश की एक कॉपी लगाई गई, जबकि जीणी पंचायत की मतदाता सूची में उनका नाम दर्ज नहीं था।

निर्वाचन आयोग ने मांगी सत्यापित प्रति

नामांकन से जुड़े मामले में रिटर्निंग ऑफिसर (RO) ने मतदाता सूची का पोर्टल खोलने के लिए निर्वाचन अधिकारी से सिफारिश की थी। इसके बाद निर्वाचन आयोग से मार्गदर्शन मांगा गया। आयोग ने हाईकोर्ट के आदेश की सत्यापित प्रति उपलब्ध कराने को कहा, लेकिन वह नहीं दी गई। इसके बाद जयप्रकाश का नामांकन निरस्त कर दिया गया।

विधायक पुत्र ने आरोपों से किया इनकार

जयप्रकाश ने कहा कि उन्होंने नाम जुड़वाने के लिए कोर्ट में याचिका लगाई थी, लेकिन समयसीमा निकल जाने के कारण नाम नहीं जुड़ पाया। उन्होंने नामांकन पत्र के साथ कोई आदेश लगाने से इनकार किया। उनके मुताबिक, किसी अन्य व्यक्ति ने एसडीएम को आदेश भेजा होगा। उन्होंने इस संबंध में जानकारी होने से भी इनकार किया।

आदेश फर्जी होने पर दर्ज होगी FIR

एसडीएम और रिटर्निंग ऑफिसर संदीप चौधरी ने बताया कि नामांकन के दौरान हाईकोर्ट के आदेश का प्रिंट लगाया गया था। निर्वाचन आयोग से मार्गदर्शन मांगा गया और आयोग ने आदेश की सत्यापित प्रति उपलब्ध कराने को कहा था, जो नहीं मिली। झुंझुनूं के कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग ने बताया कि सूरजगढ़ के रिटर्निंग ऑफिसर से मिले मामले पर निर्वाचन आयोग को पत्र लिखा गया था। उन्होंने कहा कि यदि कोर्ट का आदेश फर्जी पाया जाता है, तो एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

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