Dharm Desk : कार्तिक मास भगवान शंकर और माता लक्ष्मी की आराधना का विशेष समय होता है। इस बार 6 नवंबर शुक्रवार को धनतेरस के साथ कार्तिक प्रदोष का भी संयोग बनने वाला है। धनतेरस पर भगवान धनवंतरी, माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा की जाएगी वहीं प्रदोष काल में भगवान शंकर की उपासना का विधान रहता हैं।इस दिन खरीदारी और पूजा-पाठ के साथ शंकर मंदिर में विशेष दीपक जलाने की एक लोक परंपरा भी प्रचलित है। इस दीपक को दस विद्या दीप कहा जाता है।प्रदोष काल में भगवान शंकर की बाईं ओर यह दीपक जलाने से दस विद्याओं की कृपा और महादेव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।श्रद्धालु इसे धन-धान्य, सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य की कामना से जोड़ते हैं।

कार्तिक प्रदोष पर क्यों जलाया जाता है विशेष दीपक

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शंकर को समर्पित है। हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है।इस दिन सूर्यास्त के आसपास के समय को प्रदोष काल कहते है।इस समय भगवान शंकर की पूजा और दीपदान करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। कार्तिक मास में प्रदोष की पूजा का विशेष महत्व होता है। इसी अवसर पर विशेष दीपक जलाने की परंपरा है।

घी और तेल से तैयार करें दस विद्या दीप

इस उपाय के लिए सबसे पहले एक मिट्टी का दीपक लेना चाहिए। इसमें गाय के घी में भगोई हुई बत्ती रखें। इसके बाद दीपक में थोड़ा तेल भी मिलाया जाता है। इस प्रकार तैयार दीपक को प्रदोष काल में भगवान शंकर के मंदिर में ले जाकर प्रज्वलित करें।

भगवान शंकर की बाईं ओर रखें दीपक

इस उपाय में दीपक रखने की दिशा का विशेष महत्व है।तैयार दीपक को शंकर मंदिर में भगवान के बाईं ओर रखना चाहिए। दीपक प्रज्वलित करते समय शंकर जी का ध्यान करते हुए सुख शांति और समृद्धि की कामना करनी चाहिए।

दस विद्याओं और दस शिव स्वरूपों से जुड़ी मान्यता

लोक मान्यताओं में इस दीपक को दस विद्या दीप कहते है। इसे विधिपूर्वक प्रज्वलित करने से दसों विद्याओं की कृपा प्राप्त होती है। इसके साथ ही शंकर जी के दस स्वरूपों का आशीर्वाद मिलता है। इस उपाय को धन-संपदा और वैभव की प्राप्ति से जोडा जाता है।कार्तिक प्रदोष पर शंकर जी के समक्ष दीपदान करने से जीवन में सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।