स्पेशल इंटेंसिव रिविजन को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति और अर्थशास्त्री-लेखक पराकला प्रभाकर ने केंद्र और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि SIR से लोकतंत्र खतरे में है. पराकला प्रभाकर ने कहा कि SIR का विरोध केवल चुनावी प्रक्रिया के स्तर पर नहीं, बल्कि बुनियादी स्तर पर होना चाहिए. उन्होंने SIR को ‘सवर्ण हिंदू राष्ट्र’ बनाने की कोशिश बताया.

चेन्नई में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने दावा किया कि SIR सिर्फ चुनाव से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि यह भारत को ‘सवर्ण हिंदू राष्ट्र’ बनाने की कोशिश का हिस्सा है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति परकला प्रभाकर ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि SIR से लोकतंत्र खतरे में है और वोटर लिस्ट से अल्पसंख्यक, दलित व हाशिए पर मौजूद लोगों के नाम हटाए गए. जिन लोगों के नाम हटाए गए, उनमें ज्यादातर मुसलमान, ईसाई, अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी और हाशिए पर रहने वाले या जिनकी आवाज नहीं सुनी जाती, ऐसे लोग शामिल थे.

चेन्नई के पेरियार थिडल में ‘मूवमेंट फॉर रिट्रीविंग वोटर राइट्स’ की तरफ से आयोजित ‘EVM पर रोक लगाओ, SIR को खारिज करो’ (Ban EVM, Reject SIR) कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रभाकर ने आगे कहा कि विरोध इस बात को लेकर होना चाहिए कि यह प्रक्रिया देश को किस दिशा में ले जाएगी.

परकला प्रभाकर ने राजनीतिक दलों से एकजुट रहने और SIR के खिलाफ मजबूती से लड़ने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए अब बहुत कम समय बचा है.

उन्होंने EVM के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए और कहा कि इससे जुड़े कई सवाल अभी तक अनुत्तरित हैं. उन्होंने 2024 लोकसभा चुनाव का अध्ययन करके दावा किया कि 2024 का जनादेश चुराया हुआ था. यह उनका राजनीतिक दावा है.

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