Business Desk – Gold Price Rally Mystery : अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने करीब तीन साल बाद ब्याज दर में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की। इसके साथ फेड फंड्स रेट बढ़कर 3.75% से 4% हो गया। आमतौर पर ब्याज दर बढ़ना सोने के लिए नकारात्मक माना जाता है। ज्यादा ब्याज मिलने पर निवेशक बिना ब्याज वाले सोने के बजाय बॉन्ड और डॉलर को प्राथमिकता दे सकते हैं। लेकिन इस बार तस्वीर इतनी सीधी नहीं है। पिछले करीब चार दशक के आंकड़ों में कई मौकों पर फेड की पहली दर बढ़ोतरी के बाद सोने ने अच्छा प्रदर्शन किया है।

क्या शुरू हो गया है नया ब्याज दर चक्र?

16 सितंबर की बढ़ोतरी को अभी पूरी तरह नया रेट हाइक साइकिल कहना जल्दबाजी होगी। आम तौर पर लगातार तीन या उससे ज्यादा बार ब्याज दर बढ़ने पर इसे रेट हाइक साइकिल माना जाता है। फेड के नए डॉट प्लॉट में 2026 में एक और और 2027 में एक बढ़ोतरी का संकेत दिया गया है। हालांकि आगे का फैसला महंगाई, रोजगार और आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा।

पहली बढ़ोतरी के बाद सोने का क्या रहा इतिहास?

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने 1994, 1999, 2004 और 2015 से शुरू हुए पिछले चार फेड टाइटनिंग साइकिल का विश्लेषण किया। इसमें पाया गया कि पहली दर बढ़ोतरी से पहले सोना कमजोर रहा, लेकिन इसके छह महीने और एक साल बाद मीडियन रिटर्न सकारात्मक रहा। पहली बढ़ोतरी से छह महीने पहले मीडियन रिटर्न करीब -7% था, जो छह महीने बाद करीब 11% और एक साल बाद करीब 7% हो गया।

1994 में कमजोर रहा था सोना

1994 में फेड ने फरवरी में करीब 3% की दर से बढ़ोतरी शुरू की थी। फरवरी 1995 तक फेड फंड्स रेट करीब 6% पहुंच गया। यह तेज ब्याज दर बढ़ोतरी का दौर था और इस दौरान सोने का प्रदर्शन कमजोर रहा।

2004 में बढ़ती दरों के बावजूद चढ़ा गोल्ड

जून 2004 में फेड ने करीब 1% से दर बढ़ाना शुरू किया। यह दर 2006 तक बढ़कर 5.25% हो गई। इस दौरान 17 बार बढ़ोतरी हुई और कुल 425 बेसिस प्वाइंट की वृद्धि हुई। इसके बावजूद इसी अवधि में सोने की कीमत करीब 49% चढ़ी। यानी ब्याज दर बढ़ना अकेले सोने की कीमत गिरने की गारंटी नहीं है।

महंगाई और वास्तविक रिटर्न भी अहम

सोने पर ब्याज दर का असर महंगाई और रियल रिटर्न से भी जुड़ा है। अगर बॉन्ड से 5% रिटर्न मिल रहा है, लेकिन महंगाई 6% है, तो वास्तविक रिटर्न नकारात्मक रहेगा। ऐसे माहौल में सोना महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता से बचाव के तौर पर आकर्षक बन सकता है।

2013 और 2022 में बदली तस्वीर

2013 के टेपर टैंट्रम में फेड के मौद्रिक समर्थन को कम करने के संकेतों के बाद सोना करीब 1,700 डॉलर प्रति औंस से गिरकर 1,200 डॉलर से नीचे आ गया था। वहीं 2022 में फेड ने मार्च से जुलाई 2023 तक दरें बढ़ाईं और फेड फंड्स रेट करीब 0% से बढ़कर 5% से ऊपर पहुंच गया।

इसी दौरान जून 2022 में अमेरिका की सीपीआई महंगाई 9.1% तक पहुंची। इसके बाद बाजार में आगे दरों में कटौती की उम्मीद बनने लगी और सोने में तेजी पहले ही शुरू हो गई।

2023 से 2025 तक तेज रही सोने की चाल

ब्याज दरों के दबाव के बावजूद सोने ने मजबूत प्रदर्शन किया। बाजार विश्लेषण के अनुसार सोना 2023 में करीब 13%, 2024 में करीब 25% और 2025 में करीब 65% चढ़ा। इस तेजी में महंगाई, डॉलर, भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी की भी भूमिका रही।

केंद्रीय बैंकों की खरीदारी बनी बड़ी ताकत

पिछले कुछ वर्षों में केंद्रीय बैंकों ने लगातार 1,000 टन से ज्यादा सोना सालाना खरीदा। रूस-यूक्रेन युद्ध, चीन-ताइवान तनाव और इजरायल-हमास संघर्ष जैसे घटनाक्रमों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग को सहारा दिया।

एमसीएक्स पर भी दिखी मजबूती

अमेरिकी दर बढ़ोतरी के बाद भारतीय बाजार में भी सोना मजबूत रहा। 16 सितंबर को एमसीएक्स स्पॉट गोल्ड करीब 1,51,940 रुपए प्रति 10 ग्राम था, जो बढ़कर करीब 1,53,200 रुपए तक पहुंच गया। यानी फेड की दर बढ़ोतरी के बावजूद घरेलू बाजार में सोने पर दबाव के बजाय मजबूती देखने को मिली।