Dharm Desk : हिंदू धर्म में कार्तिक मास को पूजा-पाठ, व्रत, उपवास और आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इस पूरे महीने भगवान विष्णु और भगवान शिव की आराधना के साथ दीपदान का भी विशेष स्थान है। कार्तिक मास में दीप प्रज्वलित करना अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने, ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा के संचार का प्रतीक है। इस दौरान मंदिरों, तुलसी के पौधे और पवित्र नदियों के किनारे दीप जलाने की परंपरा निभाई जाती है।

दीपक की लौ मन को शांति प्रदान करती है और आस-पास के वातावरण को भक्तिमय बनाती है। नियमित रूप से दीपदान करना ईश्वर के प्रति श्रद्धा, समर्पण और भक्ति भाव व्यक्त करने का एक सुंदर माध्यम है। विशेष रूप से कार्तिक मास में 108 बत्तियों से दीप प्रज्वलित करने का अपना अलग महत्व है।

108 बत्तियों से दीपदान का विशेष विधान

कार्तिक महीने में 108 बत्तियों को मिलाकर तैयार किया गया विशेष दीपक प्रज्वलित करने का विधान है। इसे सहस्रावली बत्ती के नाम से भी जाना जाता है। पूजा-पाठ में 108 की संख्या का विशेष स्थान है। इसी बजह से इस महीने में 108 बत्तियों से दीपदान करने को विशेष पुण्यकारी माना जाता है। इस दीपदान से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें जानना जरूरी है।

  1. 108 बत्तियों का विशेष दीपक

कार्तिक मास में 108 बत्तियों को एक साथ मिलाकर विशेष दीपक तैयार किया जाता है। सामान्य दीपक की तुलना में यह बत्ती आकार में बड़ी और मोटी होती है। इसे तैयार करने के बाद घी में अच्छी तरह भिगोया जाता है और फिर श्रद्धापूर्वक प्रज्वलित किया जाता है। पूजा के दौरान इस दीपक को जलाकर भगवान के समक्ष अपनी श्रद्धा अर्पित की जाती है।

  1. कैसे तैयार करें 108 बत्तियों का दीपक

इस विशेष दीपक को तैयार करने के लिए सबसे पहले 108 लंबी बत्तियां ली जाती हैं। इन सभी बत्तियों को एक साथ मिलाकर एक बड़ी बत्ती का आकार दिया जाता है। इसके बाद इसे घी में अच्छी तरह डुबोया जाता है, ताकि बत्ती पूरी तरह घी सोख ले। फिर इसे उपयुक्त बड़े दीपक में रखकर प्रज्वलित किया जाता है। दीपक तैयार करते समय बत्तियों को व्यवस्थित रखना जरूरी है, जिससे वे एक साथ अच्छी तरह जल सकें।

  1. किस मंदिर में दीपदान करें

108 बत्तियों से तैयार इस विशेष दीपक को भगवान विष्णु के नारायण मंदिर या भगवान शिव के मंदिर में प्रज्वलित किया जा सकता है। इसके अलावा अपने आराध्य देव के मंदिर में भी दीपदान किया जा सकता है। दीपक जलाते समय स्वच्छता का ध्यान रखें और उसे ऐसे सुरक्षित स्थान पर रखें, जहां आग लगने का खतरा न हो। दीप प्रज्वलित करने के बाद भगवान के समक्ष कुछ समय बैठकर मंत्र जाप और प्रार्थना भी कर सकते हैं।

  1. समस्त तीर्थों के दर्शन के पुण्य से जुड़ा है दीपदान

कार्तिक मास में इस विशेष दीपदान का संबंध तीर्थ दर्शन और पुण्य प्राप्ति से भी जुड़ा हुआ है। जिन लोगों के लिए विभिन्न तीर्थस्थलों की यात्रा करना, पवित्र नदियों में स्नान करना या प्रमुख धार्मिक स्थानों के दर्शन करना संभव नहीं हो पाता, वे अपने आराध्य देव के मंदिर में 108 बत्तियों का दीपक प्रज्वलित कर पूजा-अर्चना कर सकते हैं। इस दीप दान को समस्त तीर्थों के दर्शन और स्नान के पुण्य से जोड़कर देखा जाता है। इस प्रकार कार्तिक मास में दीपदान भक्ति, साधना और आध्यात्मिक शांति का महत्वपूर्ण माध्यम बन जाता है।