कर्नाटक में स्टिंग ऑपरेशन विवाद गहरा होते जा रहा है। इस पूरे विवाद में राजनैतिक उठापटक जारी है। ताजा हालात की बात करें तो, इस विवाद की आंच केंद्रीय मंत्री और जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी तक पहुंच गई है। केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकार पर उन्हें फंसाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।

बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर सीमांत कुमार सिंह ने रविवार को बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया को निशाना बनाने वाले स्टिंग ऑपरेशन में जिस मोबाइल फोन का इस्तेमाल किया गया था, उसे दिल्ली में खरीदा गया था। इसके बाद, राष्ट्रीय राजधानी में कुमारस्वामी के सरकारी आवास पर इसे प्रज्वल प्रसाद नाम के एक व्यक्ति को सौंप दिया गया। कमिश्नर ने इस मामले में गिरफ्तार आरोपी रितेश पांडे के बयान का हवाला देते हुए बताया कि यह फोन प्रसाद के निर्देश पर सौंपा गया था।

पुलिस ने आरोपी को किया था गिरफ्तार

बेंगलुरु पुलिस की सेंट्रल क्राइम ब्रांच ने दिल्ली के रहने वाले रितेश पांडे को 24 अक्टूबर को गिरफ्तार किया था। उस पर सोशल मीडिया पर कथित स्टिंग ऑपरेशन का वीडियो अपलोड करने का आरोप है। वह इस मामले में गिरफ्तार होने वाला पहला आरोपी था। बेंगलुरु पुलिस की सेंट्रल क्राइम ब्रांच सिंतबर के महीने में यूट्यूब पर दो वीडियो अपलोड किए गए थे, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के खिलफ गंभीर आरोप लगाए गए थे।

पुलिस कमिश्नर सीमांत कुमार सिंह ने बताया कि, प्रज्वल प्रसाद के निर्देश पर, विनोद शर्मा और रितेश पांडे ने करोग बाग की एक दुकान से मोबाइल खरीदा। बाद में फोन को दिल्ली में कुमारस्वामी के सरकारी आवास पर उसे प्रज्वल प्रसाद को सौंप दिया। पुलिस ने दावा किया है कि ये तीनों कुमारस्वामी के कार्यालय में काम करते थे। सिंह ने बताया कि मामले की अभी जांच चल रही और फिलहाल किसी भी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।

कुमारस्वामी ने आरोपों को किया खारिज

केंद्रीय मंत्री ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राज्य सरकार या उसके अधिकारी उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकते। कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने उन्हें इस कथित स्टिंग ऑपरेशन में फंसाने की साजिश रची है। उन्होंने दावा किया कि जांच का रुख जानबूझकर को निशाना बनाने की ओर मोड़ा जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भले ही आरोपियों ने कथित तौर पर स्टिंग ऑपरेशन करने की बात कबूल कर ली है, फिर भी राज्य सरकार उनके खिलाफ शक पैदा करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि शिवकुमार और खरगे जांच का ध्यान उनकी और उनकी पार्टी की ओर मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। कुमारस्वामी ने कहा, हम इससे डरते नहीं हैं। हमारी पार्टी में इसका सामना करने की ताकत है।

आरोपियों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई

राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा कि मामले की जांच आगे बढ़ रही है और इसमें तकनीकी सबूत तथा कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। उन्होंने कहा कि जो भी इसमें शामिल पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, चाहे उसका कितना भी प्रभाव या पद क्यों न हो।

क्या है पूरा मामला ?

वीडियो का वायरल होना: सितंबर-अक्टूबर 2026 में सोशल मीडिया पर ‘कर्नाटक हनी ट्रैप’ नामक अकाउंट से एक वीडियो क्लिप जारी की गई थी, जिसमें एक महिला द्वारा सिद्धारमैया पर यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए गए थे। विरोधी दलों (JDS और BJP) ने दावा किया कि इसी स्टिंग के डर से सिद्धारमैया को पूर्व में मुख्यमंत्री का पद छोड़ना पड़ा था।

सिद्धारमैया का रुख: सिद्धारमैया ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे ब्लैकमेल करने और छवि खराब करने की साजिश बताया था। उन्होंने इसके खिलाफ कोर्ट से इसके प्रसारण पर रोक (Injunction) भी ली और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

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