Tika Ram Jully attack Modi Rahul debate Villa scam: राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राहुल गांधी के साथ पांच मिनट की खुली बहस करने की चुनौती स्वीकारने की बात कही।

उन्होंने राहुल गांधी को संविधान और लोकतंत्र की लड़ाई लड़ने वाला योद्धा बताते हुए कहा कि वे भाजपा के दबाव में आने वाले नहीं हैं। जूली ने केंद्र की भाजपा सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने और लोकतांत्रिक संस्थाओं की अनदेखी करने के आरोप लगाए। इसके साथ ही उन्होंने राजस्थान की भजनलाल सरकार से कथित रिसॉर्ट छूट और विला खरीद प्रकरण की जांच कराने की मांग भी की।

राहुल गांधी भाजपा के काबू में आने वाले नहीं

टीकाराम जूली ने कहा कि भाजपा की राजनीति राहुल गांधी को निशाना बनाने के इर्द-गिर्द घूम रही है, जबकि राहुल गांधी संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने भाजपा नेताओं के लोकतंत्र बचाओ और अराजकता भगाओ जैसे अभियानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में गतिरोध और विपक्ष की आवाज दबाने के लिए भाजपा को पहले अपने आचरण पर विचार करना चाहिए।

जूली ने संसद में विपक्षी सांसदों के निलंबन, सदन की कार्यवाही बाधित होने और विरोध प्रदर्शनों के लिए स्थानों पर लगाई गई पाबंदियों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा असल मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय जाति और धर्म की राजनीति कर रही है।

पीएम मोदी राहुल गांधी की चुनौती स्वीकारें: जूली

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पांच मिनट की खुली बहस की चुनौती दी है। साथ ही संघ प्रमुख मोहन भागवत को निर्णायक बनाने की बात कही है। जूली के मुताबिक, प्रधानमंत्री को इस चुनौती को स्वीकार करना चाहिए और बहस खुले मंच पर होनी चाहिए, ताकि जनता खुद तय कर सके कि देश के मुद्दों पर कौन क्या कह रहा है और किसके पास सवालों के जवाब हैं।

रिसॉर्ट को मिली छूट और विला खरीद की जांच की मांग

राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए जूली ने कथित रिसॉर्ट छूट और विला खरीद प्रकरण में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि निवेश आकर्षित करने के नाम पर मिलने वाली सरकारी छूट का मकसद प्रदेश में उद्योग और रोजगार बढ़ाना होना चाहिए, न कि किसी उद्योगपति, अधिकारी या राजनेता को निजी लाभ पहुंचाना।

उन्होंने संबंधित रिसॉर्ट को दी गई छूट के फैसलों की समीक्षा के लिए स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की। जूली ने कहा कि यदि ये निर्णय मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति में हुए हैं तो मुख्यमंत्री को सामने आकर बताना चाहिए कि किस प्रस्ताव और किस आधार पर छूट दी गई। उन्होंने एक वरिष्ठ अधिकारी के स्तर पर कुछ लोगों और फर्मों को लाभ पहुंचाने तथा विला खरीदकर उन्हें किराए पर देने से जुड़े आरोपों का भी जिक्र किया।

‘क्या ईडी की जांच सिर्फ विपक्ष तक सीमित है?’

जूली ने कथित वित्तीय अनियमितताओं और करोड़ों रुपये के लेनदेन की आशंका का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि मामले में गड़बड़ी हुई है तो संबंधित जांच एजेंसियों को इसकी पड़ताल करनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ईडी की जांच केवल विपक्षी नेताओं और राजनीतिक दलों तक सीमित है? भाजपा से जुड़े लोगों के मामलों में भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पद की गरिमा याद दिलाई

जूली ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के जोधपुर में दिए गए बयान पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का पद संवैधानिक और गरिमामय है। इस पद पर बैठे व्यक्ति को पूर्व मुख्यमंत्रियों समेत सभी राजनीतिक व्यक्तियों के बारे में बोलते समय मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री को पिछली सरकार के किसी फैसले या कामकाज पर आपत्ति है तो उन्हें तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए।

पंचायत और निकाय चुनाव में देरी पर भी उठाए सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने वन स्टेट, वन इलेक्शन की बात करने वाली भाजपा सरकार पर पंचायत और निकाय चुनाव समय पर नहीं कराने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव में देरी से आम लोगों को परेशानी हो रही है। त्योहारों के दौरान भी लोगों को चुनावी गतिविधियों में व्यस्त रहना पड़ रहा है। जूली ने भाजपा पर बाड़ेबंदी की राजनीति को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसी गतिविधियां लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ठीक नहीं हैं।

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