तिलक का अर्थ पूजा के समय माथे पर लगाए जाने वाला शुभ चिह्न है। हर तिलक का अलग-अलग महत्व है। संत कुमकुम, चंदन, हल्दी व भस्म का तिलक लगाते हैं। मान्यता है कि माथे के मध्य भाग में तिलक लगाने से एकाग्रता, संयम, आत्म शक्ति में वृद्धि होती है।
तिलक न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। यह आपकी एक अलग छवि बनाता है साथ ही इससे आपके व्यक्तित्व में भी विकास होता है।

वैज्ञानिक फायदे
तिलक का प्रयोग करने से हमारे मस्तिष्क की तंत्रिकाएं शांत मुद्रा में रहती हैं। इससे सिरदर्द जैसी गंभीर समस्या दूर रहती है। अनिद्रा या तनाव हाेने पर माथे के बीच में मालिश करके चंदन का तिलक लगाना चाहिए।
तिलक लगाने से व्यक्ति की एकाग्रता शक्ति बढ़ती है और शरीर में सकारात्मक उर्जा का संचार होता है। अगल अलग तरह के तिलक लगाने से इसके अलग फायदे भी होते हैं। इससे आज्ञा चक्र की शुद्धि होती है। ज्ञान की प्राप्ति होती है। केसर का तिलक लगाने से मस्तिष्क को शीतलता प्राप्त होती है।
वहीं, चंदन का तिलक दिमाग को शीतलता प्रदान करता है। इससे मानसिक शांति बनी रहती है। भस्म का तिलक लगाने से मस्तिष्क विषाणुओं से मुक्त रहता है और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह निरंतर बना रहता है।

तीन प्रकार के होते हैं तिलक
हिंदू धर्म में तीन तरह के तिलक होते हैं- वैष्णव तिलक (वैष्णव तिलक का महत्व), शैव तिलक और शाक्त तिलक। इन तीन प्रकार के तिलकों के भीतर अनेकों सम्प्रदाय के अपने-अपने अलग तिलक हैं। वैष्णव तिलक वह लगाते हैं जो भगवान विष्णु के अनुयायी होते, शैव भगवान शिव के भक्त त्रिकुंड तिलक लगाते है। वहीं,शाक्त तिलक एक बिंदी के रुप में भगवती के भक्त लगाते है। हिन्दू धर्म के अनुसार हर व्यक्ति को रोज तिलक लगाना चाहिए।
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