DHARAM DESK:- गणेश उत्सव के दौरान बप्पा की पूजा-अर्चना के साथ उनके स्तोत्र और गणेश अथर्व शीर्ष का पाठ करना विशेष लाभकारी होता है।इस पाठ से मन को एकाग्र करने पूजा में ध्यान लगाने और भगवान गणपति की आराधना को विशेष बनाने में सहायता मिलती है। गणेश स्तोत्र में भगवान गणपति के विभिन्न स्वरूपों गुणों और महिमा का स्मरण किया जाता है। श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार, सुबह या शाम पूजा के समय गणेश स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं।

स्रोत की शुरुआत इस विधि से करें

पाठ के दौरान भगवान गणपति के सामने दीपक जलाकर दूर्वा फूल और मोदक चढ़ाए।गणेश स्तोत्र का पाठ करते समय भक्त भगवान गणपति के स्वरूप और गुणों का स्मरण करें। धार्मिक परंपरा में इसे विघ्नों से मुक्ति, कार्यों में सफलता और बुद्धि-विवेक की कामना से जोड़ा गया है। विद्यार्थी को पढ़ाई में एकाग्रता और ज्ञान की प्राप्ति की कामना के लिए इस पाठ को जरूर करना चाहिए।

अथर्व शीर्ष पाठ के फायदे

1.गणेश अथर्व शीर्ष अथर्ववेद से संबंधित उपनिषद्-परंपरा का एक महत्वपूर्ण संस्कृत पाठ है। इसमें भगवान गणपति को ब्रह्म स्वरूप बताया गया है और उनके स्वरूप की स्तुति की गई है। गणेश पूजा के दौरान अथर्व शीर्ष का पाठ करने की परंपरा कई परिवारों और धार्मिक अनुष्ठानों में देखने को मिलती है।

2.गणेश अथर्व शीर्ष का पाठ श्रद्धा और शांत मन से करे। पाठ को मानसिक शांति एकाग्रता और आध्यात्मिक साधना से जोड़ा गया है। विशेष रूप से गणेश उत्सव में सामूहिक रूप से अथर्व शीर्ष का पाठ किसी वरदान से काम नहीं है।

3.सामर्थ्य और परंपरा के अनुसार, जब आपको इससे लाभ मिलना शुरू हो जाए तब पाठकों की संख्या को पढ़ाया भी जा सकता है। इसे प्रतिदिन भी कर सकते हैं या गणेश उत्सव समाप्त होने के बाद जैसा कि भगवान गणपति को बुधवार का दिन बहुत प्रिय है। उस दिन भी इस सप्ताह में एक बार किया जा सकता है। पाठ करते समय उच्चारण पर विशेष ध्यान रखना चाहिए। संस्कृत मंत्रों का अर्थ समझकर और शांत भाव से पाठ करना पूजा की प्रक्रिया को अधिक भावपूर्ण बनाता है।