Dharm Desk : प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण दिन होता है। शुक्रवार को पड़ने वाले प्रदोष व्रत को शुक्र प्रदोष कहा जाता है। अश्विन मास और अक्टूबर महीने का यह अंतिम प्रदोष व्रत है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने का विधान है। मान्यता है कि प्रदोष काल में विधि-विधान से महादेव की आराधना करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। जीवन की परेशानियों से मुक्ति पाने का आर्शीवाद मिलता है। शुक्र प्रदोष व्रत को शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने और सुख-समृद्धि की कामना के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

भगवान शिव के अभिषेक का कितने बजे से है मुहूर्त

शुक्र प्रदोष व्रत की पूजा शाम के समय प्रदोष काल में की जाती है। आज पूजा का मुहूर्त शाम 5:44 बजे से शुरू होगा। व्रत रखने वाले श्रद्धालु दिन में अपनी नियमित पूजा कर सकते है। लेकिन भगवान शिव की विशेष पूजा सूर्यास्त के आस-पास प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है। पूजा के समय शिव परिवार का ध्यान करके सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना करनी चाहिए।

प्रदोष व्रत का क्या है महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर आनंदपूर्वक नृत्य करते हैं। इस समय उनकी आराधना करने से विशेष कृपा की प्राप्ति होती है। प्रदोष व्रत प्रत्येक पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। शुक्रवार को पड़ने के कारण इसे शुक्र प्रदोष कहा जाता है।

शुक्र प्रदोष व्रत करने के क्या लाभ हैं

शुक्र प्रदोष व्रत में महादेव और माता पार्वती की पूजा करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति की कामना की जाती है। मान्यता है कि इस व्रत से शत्रुओं पर विजय, पारिवारिक सुख और जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति का आशीर्वाद मिलता है। भक्त अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए भी यह व्रत रखते हैंl। व्रत के दौरान मन को शांत रखकर भगवान शिव का ध्यान करना और जरूरतमंद की सहायता करना भी शुभ माना जाता है।

शुक्र प्रदोष व्रत की पूजा विधि

व्रत रखने वाले श्रद्धालु शाम को पूजा की तैयारी करें। भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं। शिवलिंग पर जल अर्पित करें और उपलब्धता के अनुसार दूध, बेलपत्र, फूल, धतूरा तथा फल चढ़ाएं। इसके बाद भगवान शिव को धूप-दीप दिखाकर मंत्र जप करें। पूजा के दौरान शिव चालीसा पढ़ें और शिव आरती करें। अंत में भगवान शिव और माता पार्वती से सुख-शांति तथा परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें।

भगवान शिव का मंत्र और आरती

शुक्र प्रदोष व्रत की पूजा के दौरान इस मंत्र का जप करें। मंत्र: ओम नमः शिवाय। मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करने के बाद भगवान शिव की आरती करें। इसके लिए ओम जय शिव ओंकारा’ आरती गाई जा सकती है। पूजा पूरी होने पर भगवान को फल या मिठाई का भोग लगाएं और प्रसाद वितरित करें। व्रत के नियम अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार निभाएं।