टोहाना : गरीबी और मजबूरी इंसान को किस कदर लाचार बना देती है, इसकी एक बेहद दर्दनाक तस्वीर हरियाणा के टोहाना से सामने आई है। यहाँ बिहार से रोजी-रोटी की तलाश में आए एक बुजुर्ग मजदूर की हत्या के बाद, आर्थिक तंगी के चलते उनका परिवार अंतिम विदाई देने भी नहीं पहुंच सका। आख़िरकार, रोते-बिलखते बच्चों ने मीलों दूर बैठकर मोबाइल की स्क्रीन पर वीडियो कॉल के जरिए अपने पिता का अंतिम संस्कार देखा।

रोजगार की तलाश में आए थे टोहाना

जानकारी के अनुसार, बिहार के पूर्णिया जिले के चरलुवा गांव के रहने वाले 51 वर्षीय किशन लाल शर्मा करीब 10 दिन पहले ही काम की तलाश में टोहाना (फतेहाबाद) आए थे। वे यहाँ ढंगराह गांव के पास रह रहे थे। 28 सितंबर को किसी बात को लेकर उनका ओमप्रकाश नाम के एक स्थानीय व्यक्ति से झगड़ा हो गया। इस आपसी विवाद में किशन लाल के सिर पर गंभीर चोट लगी, जिससे उनकी मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में मकान मालिक के बयानों के आधार पर केस दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

अंतिम सफर में भी नसीब नहीं हुआ अपनों का कंधा

मौत के बाद जब पुलिस ने किशन लाल के परिवार से संपर्क किया, तो गरीबी का एक सबसे क्रूर चेहरा सामने आया। किशन लाल की पत्नी का देहांत 15 साल पहले ही हो चुका था। परिवार में उनकी बुजुर्ग मां, गुरुग्राम में रह रही बेटी और बिहार में रह रहे बच्चे हैं। आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि किसी के पास भी टोहाना पहुंचने तक के पैसे नहीं थे। अपनों की दूरियों और तंगी के आगे बेबस परिवार का रो-रोकर बुरा हाल था।

पुलिस ने निभाया फर्ज, मोबाइल बना जरिया

जब पुलिस को परिजनों की इस लाचारी का पता चला, तो उन्होंने इंसानियत की मिसाल पेश की। चंडीगढ़ रोड पुलिस चौकी के जांच अधिकारी मंजीत सिंह और स्थानीय लोगों ने मिलकर खुद अंतिम संस्कार की सारी व्यवस्था की। इसके बाद, गांव के मुखिया और परिजनों को वीडियो कॉल के जरिए जोड़ा गया।

एक तरफ टोहाना में किशन लाल की चिता सज रही थी, तो दूसरी तरफ मोबाइल स्क्रीन पर उनके बेटे रोहित, बेटी अन्नू और अन्य परिजनों के आंसू बह रहे थे। छलकती आंखों और सिसकियों के बीच, अपनों ने दूर रहकर ही किशन लाल को अंतिम विदाई दी। खाकी के इस मानवीय चेहरे और स्थानीय लोगों की मदद से बुजुर्ग का अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।