सुंदरगढ़। केंद्र सरकार द्वारा पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आर्थिक, सामाजिक और कौशल विकास के क्षेत्र में सशक्त बनाने के उद्देश्य से 2023 में पीएम विश्वकर्मा योजना (PM Vishwakarma Scheme) शुरू की गई थी। हालांकि, लगभग तीन साल बीत जाने के बाद भी यह महत्वाकांक्षी योजना पश्चिमी ओडिशा के 10 जिलों के पारंपरिक कारीगरों के लिए काफी हद तक पहुंच से बाहर साबित हो रही है। बढ़ई, लोहार, कुम्हार, दर्जी और सुनार जैसे पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े हजारों पात्र लाभार्थी योजना के लाभ से वंचित हैं।

1.29 लाख आवेदनों में से केवल 22,016 कारीगरों का पंजीकरण

सुंदरगढ़ के अलावा पश्चिमी ओडिशा के अन्य जिलों बलांगिर, बरगढ़, बौध, देवगढ़, झारसुगुड़ा, कालाहांडी, नुआपाड़ा, संबलपुर और सोनपुर की स्थिति भी काफी चिंताजनक है। आंकड़ों के अनुसार, इन 10 जिलों में कुल 1,29,251 पात्र कारीगरों ने योजना के लिए आवेदन किया था, लेकिन इनमें से केवल 22,016 (मात्र 17 प्रतिशत) का ही सफल पंजीकरण हो सका है। अकेले सुंदरगढ़ जिले की बात करें तो 29,088 आवेदनों में से केवल 3,104 आवेदन ही स्वीकृत हो पाए हैं।

टूलकिट, प्रशिक्षण और ऋण की उम्मीद अधूरी

स्थानीय कारीगरों ने अपने पैतृक व्यवसाय को आगे बढ़ाने और उन्नत टूलकिट, आधुनिक प्रशिक्षण, पहचान पत्र तथा कम ब्याज दर पर व्यावसायिक ऋण पाने की उम्मीद में काफी समय पहले ऑनलाइन आवेदन किया था। इसके बावजूद, लंबे समय से सत्यापन प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है।

प्रशासनिक ढिलाई और पोर्टल की तकनीकी समस्या बनी वजह

प्रशासनिक उदासीनता और पोर्टल में बार-बार आने वाली तकनीकी खराबी को इस विफलता का मुख्य कारण माना जा रहा है। सत्यापन और पंजीकरण प्रक्रिया रुक जाने से पात्र लाभार्थी सरकारी वित्तीय सहायता और कौशल विकास सुविधाओं का लाभ उठाने से वंचित रह गए हैं।

प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग

स्थानीय संगठनों और कारीगरों ने मांग की है कि जिला प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप कर तकनीकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए और सत्यापन प्रक्रिया में तेजी लानी चाहिए, ताकि क्षेत्र की समृद्ध पारंपरिक कला और आजीविका को बचाया जा सके।

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