दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने एक कंपनी पर लगाए गए 50 हजार रुपये के जुर्माने को माफ कर दिया। हालांकि, अदालत ने इसके बदले कंपनी के वकील के सामने एक अनोखी शर्त रख दी। हाई कोर्ट ने कंपनी के वकील को निर्देश दिया कि वह एक सप्ताह के भीतर दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) के सभी कर्मचारियों को समोसे खिलाएं और चाय पिलाएं। अदालत की इस शर्त के बाद कंपनी पर लगाया गया 50 हजार रुपये का जुर्माना माफ कर दिया गया।

न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी की पीठ ने इंडस बिर्रा बेवरेजेज की ओर से दायर याचिका को मंजूरी देते हुए कंपनी पर लगाए गए जुर्माने को माफ करने का निर्देश दिया। कंपनी ने 20 अगस्त के आदेश में लगाए गए 50 हजार रुपये के जुर्माने को माफ करने की मांग की थी। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ताओं के वकील अपने मुवक्किल को निर्देश दें कि वे एक सप्ताह के भीतर दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) के सभी कर्मचारियों को समोसे और चाय खिलाएं।

चेक बाउंस से जुड़ा मामला

यह मामला चेक बाउंस से जुड़ा है। कंपनी ने उसके खिलाफ एक व्यक्ति की ओर से दायर मामले को रद्द करने की मांग करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। 20 अगस्त को न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी की पीठ ने कंपनी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। पीठ ने पाया था कि कंपनी ने सत्र अदालत के एक आदेश को हाई कोर्ट के सामने पेश नहीं किया। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा था कि कंपनी ने अलग-अलग अदालतों के समक्ष अलग-अलग बयान दिए। पीठ के मुताबिक, हाई कोर्ट से अपने पक्ष में आदेश हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई गई और अदालत को गुमराह करने की कोशिश की गई। इसके बाद कंपनी ने जुर्माना माफ कराने के लिए नई याचिका दायर की। पीठ ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए याचिका मंजूर कर जुर्माना माफ कर दिया।

यौन उत्पीड़न के आरोप वाले गुमनाम पोस्ट हटाने की मांग

नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने पत्रकार उमर राशिद की उस याचिका पर गुरुवार को नोटिस जारी किया, जिसमें सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ किए गए गुमनाम पोस्ट हटाने की मांग की गई है। याचिका के मुताबिक, पिछले साल एक महिला वकील की ओर से किए गए इन पोस्ट में राशिद पर यौन उत्पीड़न समेत गंभीर आरोप लगाए गए थे। न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ ने राशिद की मानहानि याचिका के साथ दायर अंतरिम निषेधाज्ञा आवेदन पर प्रतिवादियों से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। सुनवाई के दौरान पीठ ने राशिद की ओर से पेश वकील अदित पुजारी से यह भी पूछा कि क्या दोनों पक्षों के बीच मामले को आपसी सहमति से सुलझाने की कोई संभावना है। वकील ने बताया कि दोनों पक्ष पहले रिश्ते में थे। पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि राशिद के खिलाफ लगाए गए आरोप सही हों या गलत, उनकी प्रकृति गंभीर है। इसके बाद अदालत ने सोशल मीडिया पोस्ट हटाने की अंतरिम राहत की मांग पर प्रतिवादियों से जवाब मांगा।

क्या है मामला

यह मामला दो महिला वकीलों की ओर से सोशल मीडिया पर किए गए गुमनाम पोस्ट से जुड़ा है। इन पोस्ट में पत्रकार उमर राशिद पर बलात्कार और कथित तौर पर जबरदस्ती बीफ खिलाने समेत गंभीर आरोप लगाए गए थे। राशिद ने इन आरोपों को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया है और संबंधित पोस्ट हटाने की मांग की है। इन आरोपों के आधार पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मई 2025 में राशिद के खिलाफ मामला दर्ज किया था। यह कार्रवाई सह्याद्री राइट्स फोरम के संयोजक तन्मय एन. की शिकायत के बाद की गई थी। शिकायतकर्ता ने गुमनाम सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर राशिद के खिलाफ जांच की मांग की थी।

NHRC की 13 मार्च की कार्यवाही में कहा गया कि दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट के संबंध में शिकायतकर्ता की ओर से कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ। इसके बाद आयोग ने मामले में आगे किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं मानी और कार्यवाही बंद कर दी। आयोग ने अपने अंतिम आदेश में कहा कि उपलब्ध तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए मामले में आगे हस्तक्षेप जरूरी नहीं है और कार्यवाही बंद की जाती है। अब दिल्ली हाई कोर्ट राशिद की ओर से दायर मानहानि मुकदमे में सोशल मीडिया पोस्ट हटाने की अंतरिम मांग पर प्रतिवादियों के जवाब पर सुनवाई करेगा।

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