सुशील खरे, रतलाम। मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में स्थित सैलाना के आदर्श एकलव्य (मॉडल) स्कूल के छात्रों ने एक बार फिर बदहाल व्यवस्थाओं और मूलभूत सुविधाओं के अभाव को लेकर शासन-प्रशासन के खिलाफ हुंकार भरी है। सोमवार (26 अक्टूबर) की सुबह स्कूल के सैकड़ों आदिवासी छात्र हॉस्टल और स्कूल में व्याप्त समस्याओं से परेशान होकर पैदल ही सैलाना से रतलाम जिला मुख्यालय के लिए निकल पड़े। अधिकारी रास्ते में गाड़ियां दौड़ाकर बच्चों को मनाते रहे, लेकिन आक्रोशित छात्र नहीं माने और करीब 20 किलोमीटर का पैदल सफर तय कर रतलाम पहुंचे।

छुट्टी के दिन पहुंचे कलेक्टर कार्यालय

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सैलाना मॉडल स्कूल और हॉस्टल में काफी समय से पानी, भोजन और अन्य बुनियादी सुविधाओं की किल्लत चल रही थी। बच्चों के अचानक सड़क पर उतरने की खबर मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। एसडीएम और शिक्षा विभाग के अधिकारी अपनी गाड़ियों से बच्चों के पीछे दौड़ते रहे और उन्हें रास्ते में ही समझाकर वापस लौटाने का प्रयास करते रहे। हालांकि, जिद पर अड़े छात्र नहीं माने और सीधे रतलाम पहुँच गए।

छुट्टी के कारण वापस लौटे

सोमवार को शासकीय अवकाश होने के कारण बच्चे जिला मुख्यालय पर अधिकारियों से सीधे मुलाकात न हो पाने पर वापस सैलाना लौट गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत सहायक आयुक्त (आदिवासी विकास विभाग) को मौके पर जाकर समस्याओं का तत्काल निराकरण करने के निर्देश दिए हैं।

विवादों का केंद्र बना सैलाना मॉडल स्कूल

सैलाना का यह मॉडल स्कूल पहली बार विवादों में नहीं आया है। इससे पूर्व भी यहाँ की अव्यवस्थाओं को लेकर छात्र पैदल मार्च निकाल चुके हैं, तब अधिकारियों ने रास्ते में आश्वासन देकर उन्हें वापस भेजा था। छात्रा की आत्महत्या का मामला: कुछ समय पूर्व इसी स्कूल के हॉस्टल में एक छात्रा द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या करने की दुखद घटना घटी थी, जिसने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया था। बार-बार सामने आ रही इन घटनाओं से स्कूल प्रबंधन और हॉस्टल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिससे अभिभावक भी अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर भारी असमंजस में हैं।

प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं और इसके पीछे की मंशा पर दो बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय सुनवाई का दावा हवा-हवाई: जब जिला कलेक्टर अजय कटेसरिया द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सभी जनसुनवाई और समस्याओं का निराकरण स्थानीय उपखंड (सैलाना) स्तर पर ही हो, तो फिर सैलाना में इन मासूम बच्चों की बात क्यों नहीं सुनी गई?

मासूमों की आड़ में राजनीति या उकसावा?

रतलाम और आसपास के आदिवासी अंचलों में मासूम स्कूली बच्चों को ढाल बनाकर पैदल मार्च कराने का एक नया ट्रेंड देखा जा रहा है। हाल ही में पड़ोसी झाबुआ जिले के पेटलावद में एकलव्य विद्यालय के बच्चों को भड़काकर आंदोलन कराने के आरोप में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या सैलाना में भी इन अबोध आदिवासी छात्रों की पढ़ाई बाधित कर कुछ स्वार्थी तत्व इन्हें पैदल मार्च के लिए प्रेरित कर रहे हैं, या फिर वाकई प्रशासनिक अनदेखी के कारण छात्र सड़क पर उतरने को मजबूर हुए हैं? फिलहाल पुलिस और प्रशासन दोनों ही पहलुओं की गहराई से जाँच कर रहे हैं।

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