प्रदीप मालवीय, उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में श्रावण-भाद्रपद मास के दूसरे सोमवार पर अलौकिक भक्ति और उल्लास का वातावरण देखने को मिल रहा है। इस पावन अवसर पर महाकाल मंदिर परिसर और गर्भगृह को देश के विभिन्न हिस्सों से मंगाए गए दुर्लभ एवं सुगंधित प्रजातियों के फूलों से भव्य रूप से सजाया गया है। आज तड़के भस्म आरती के बाद से ही राजाधिराज बाबा महाकाल के दर्शन के लिए देशभर से आए श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। शाम को बाबा महाकाल की इस वर्ष की अंतिम और भव्य ‘राजसी सवारी’ निकाली जाएगी, जिसमें भगवान महाकाल अपनी प्रजा का हाल-चाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकलेंगे।

6 स्वरूपों में दर्शन देंगे बाबा महाकाल

आज की राजसी सवारी का विशेष धार्मिक महत्व है। अवंतिकानाथ बाबा महाकाल आज अपनी प्रजा को एक साथ छह अलग-अलग दिव्य स्वरूपों में दर्शन देंगे। सवारी की भव्यता: सवारी जैसे ही मंदिर के मुख्य द्वार से बाहर निकलेगी, पुलिस बल द्वारा भगवान को गार्ड ऑफ ऑनर (सलामी) दिया जाएगा। इसके बाद ढोल-नगाड़ों, हाथी-घोड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ नगर भ्रमण शुरू होगा। अपने प्रिय राजा के स्वागत के लिए उज्जैन की जनता पलक पावड़े बिछाए बैठी है। पूरे सवारी मार्ग को तोरणद्वारों और रंगोलियों से सजाया गया है।

कोयंबटूर का दल देगा विशेष प्रस्तुति

इस बार की राजसी सवारी में सांस्कृतिक और धार्मिक आकर्षण को बढ़ाने के लिए दक्षिण भारत के कोयंबटूर से आया एक विशेष कलाकार दल अपनी मनमोहक प्रस्तुति देगा। सवारी पारंपरिक रास्तों से होती हुई मोक्षदायिनी क्षिप्रा नदी के रामघाट पहुंचेगी, जहां भगवान महाकाल का जल्याभिषेक और पूजन-अर्चन किया जाएगा। प्रशासन ने भीड़ और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कड़े इंतजाम किए हैं, ताकि श्रद्धालु सुगमता से बाबा महाकाल की राजसी सवारी के दर्शन कर सकें।

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