वीरेंद्र कुमार, नालंदा। बिहारशरीफ व्यवहार न्यायालय और हिलसा सिविल कोर्ट में 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में आयोजित होने वाली इस लोक अदालत में लंबे समय से लंबित मुकदमों और पूर्व-मुकदमेबाजी से जुड़े सुलह योग्य मामलों का आपसी समझौते के आधार पर निष्पादन किया जाएगा। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 10:30 बजे से होगी।

​ट्रैफिक चालानों के निपटारे के लिए विशेष पहल

​इस बार ट्रैफिक चालानों के तुरंत और सुगम निष्पादन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके लिए 7 सितंबर से डीटीओ कार्यालय और ट्रैफिक डीएसपी कार्यालय में प्री-रजिस्ट्रेशन हेल्प डेस्क की शुरुआत की जा चुकी है। आम जनता से अपील की गई है कि वे लोक अदालत से पहले इस हेल्प डेस्क पर पहुंचकर अपने चालान की संख्या, देय राशि और मिलने वाली संभावित राहत की जानकारी प्राप्त कर लें। प्री-सिटिंग के माध्यम से प्रक्रिया पूरी होने से मुख्य लोक अदालत के दिन मामलों के निपटारे में काफी सहूलियत मिलेगी।

​इन मामलों का होगा निष्पादन

​राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न प्रकार के मामलों को शामिल किया गया है, जो हैं:

  • ​बैंक ऋण और एलआईसी से जुड़े विवाद
  • ​श्रम विवाद, बिजली और पानी के बिल
  • ​पारिवारिक और भूमि अधिग्रहण विवाद
  • ​वेतन-भत्ते एवं सेवानिवृत्ति लाभ से जुड़े सेवा मामले
  • ​राजस्व वाद, एमएसीटी दावा वाद, किराया और निषेधाज्ञा वाद
  • ​एनआई एक्ट की धारा 138 यानी चेक बाउंस से संबंधित सुलह योग्य मामले
  • ​अन्य सभी सुलह योग्य दीवानी और आपराधिक मामले

​जागरूकता रथ और लोक अदालत के लाभ

​लोक अदालत के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुशांत कुमार ने चार जागरूकता रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया है। ये रथ जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर लोगों को लोक अदालत के फायदों के बारे में जागरूक कर रहे हैं।
​लोक अदालत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि आपसी समझौते से दीवानी मामलों के निपटारे पर नियमानुसार पहले जमा की गई कोर्ट फीस वापस मिल जाती है। इसके अलावा, समझौते के आधार पर पारित निर्णय अंतिम होता है और सामान्यतः इसके खिलाफ अपील का प्रावधान नहीं होता है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाएं और आपसी सहमति से अपने मामलों का निपटारा कर समय एवं धन की बचत करें।