प्रदीप मालवीय, उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जयिनी में मां हरसिद्धि का मंदिर देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। महाकाल मंदिर से महज 100 मीटर की दूरी पर स्थित इस ऐतिहासिक मंदिर में साल भर भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन शारदीय नवरात्रि के दौरान यहां की छटा और रौनक पूरी तरह अलौकिक हो जाती है। कोई मां के दर्शन करने पहुंचता है, तो कोई अपनी मन्नत पूरी होने पर दरबार में हाजिरी लगाता है।

नवरात्रि पर उमड़ी भारी भीड़, आकर्षक विद्युत सज्जा

उज्जैन के माता हरसिद्धि मंदिर में नवरात्रि के इन पावन दिनों में श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ रहा है। देश-विदेश से भक्त मां के दर्शन और आशीर्वाद के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर को बेहद आकर्षक तरीके से सजाया गया है। पूरे नौ दिनों तक यहां विशेष पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हो रहे हैं, जहां श्रद्धालु अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।

विशाल दीपमालिकाएं और सम्राट विक्रमादित्य से जुड़ा इतिहास

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां की दो विशाल दीपमालिकाएं हैं, जिनमें हजारों दीपक प्रज्वलित किए जाते हैं। संध्या आरती के समय जब इन दीपों को जलाया जाता है, तो नजारा देखने लायक होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहां माता सती की दाहिनी कोहनी गिरी थी। साथ ही, इसका गहरा नाता सम्राट विक्रमादित्य से भी है; मान्यता है कि राजा विक्रमादित्य ने कठोर साधना कर मां हरसिद्धि से सिद्धियां प्राप्त की थीं और वे माता के अनन्य आराध्य माने जाते हैं।

श्री यंत्र के दर्शन और तीनों रूपों के अद्भुत स्वरूप

मंदिर में स्थापित श्री यंत्र श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है, जिसके दर्शन मात्र से समृद्धि और शक्ति की प्राप्ति होती है। इस दरबार में माता अन्नपूर्णा, महालक्ष्मी और महाकाली तीनों स्वरूपों के एक साथ दर्शन होते हैं, जो भक्तों की हर मनोकामना को पूरा करते हैं।

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