प्रदीप मालवीय, उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाने वाली नीलगाय और कृष्णमृग का सुरक्षित रूप से रेस्क्यू कर दूसरी जगह पहुंचाने के लिए वन विभाग द्वारा चलाया गया विशेष अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। इस हाई-टेक अभियान के तहत उज्जैन जिले में कुल 226 वन्यजीवों का सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है, जिसमें अकेले अभियान के अंतिम दिन यानी 4 नवंबर को ग्राम पिपल्याबाच्छा में 81 नीलगाय को सकुशल पकड़ा गया।
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दक्षिण अफ्रीकी विशेषज्ञों की ली गई मदद
इस पूरे अभियान की सबसे बड़ी और खास बात यह रही कि रेस्क्यू प्रक्रिया के दौरान एक भी वन्यजीव की जान नहीं गई और सभी को पूरी तरह सुरक्षित बचाया गया। वन विभाग ने इस जटिल कार्य को अंजाम देने के लिए दक्षिण अफ्रीका की प्रसिद्ध ‘बोमा पद्धति’ का सहारा लिया। इस तकनीक के तहत दक्षिण अफ्रीकी विशेषज्ञों की देखरेख में बड़े क्षेत्र में पर्दों और प्राकृतिक रूप से हरे-भरे पेड़-पौधों की मदद से एक विशेष फनलनुमा यानि कील के आकार का रास्ता तैयार किया गया था, जिसे इस तरह ढका गया था कि वन्यजीवों को उसका आभास न हो।
अभियान के दौरान हेलीकॉप्टर की मदद से नीलगाय और कृष्णमृगों के झुंड को बिना किसी चोट के धीरे-धीरे निर्धारित रास्ते की ओर हांका गया, जहां से वे विशेष रैंप के जरिए खुद-ब-खुद ट्रकों में पहुंच गए। इसके बाद इन सभी वन्यजीवों को सुरक्षित प्राकृतिक आवासों में छोड़ दिया गया।

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किसानों को फसल नुकसान और मानव-वन्यजीव संघर्ष से मिलेगी मुक्ति
गौरतलब है कि उज्जैन के ग्रामीण अंचलों में नीलगाय और कृष्णमृगों के झुंड लगातार खेतों में घुसकर फसलों को चट कर रहे थे, जिससे अन्नदाता किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा था। कई बार इस वजह से किसानों और वन्यजीवों के बीच टकराव की स्थिति भी पैदा हो जाती थी। किसानों की इसी गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने यह विशेष अभियान चलाया था, जो अब पूरी तरह सफल साबित हुआ है। इस कार्रवाई से जहां एक तरफ किसानों को फसल बर्बादी से राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी तरफ वन्यजीवों को भी सुरक्षित नया ठिकाना मिल गया है।

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