देहरादून. 2 चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं पर आपत्ति दर्ज कराई है. जिसे लेकर एक बार फिर हरीश रावत का बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की कार्यविधि को लेकर आज बहुत चिंताजनक समाचार हैं. इतना तो सारी दुनिया-जहान को मालूम हो गया है कि इलेक्शन कमीशन सत्ता के हाथों पूरी तरीके से खिलौना बन गया है.
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आगे उन्होंने कहा कि एसआईआऱ उनके हाथ में विपक्ष को कमजोर करने का एक हथियार बन गया है और लोगों के वोट के अधिकार को छीना जा रहा है. अब ज्ञात यह हुआ है कि इलेक्शन कमीशन की जो आंतरिक कार्यविधि है, उससे भी लोकतंत्र गायब हो चुका है. दो इलेक्शन कमिश्नर, तीन में से दो ने बंगाल और दूसरे चुनावों के अंदर वोट के एडिशन और डिलीशन की प्रणाली और तरीकों पर ऑब्जेक्शंस किए. उनको ओवररूल करके चीफ इलेक्शन कमिश्नर ने वही किया जो सत्ता को भाता था.
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आगे हरीश रावत ने ये भी कहा कि संसद ने जो कानून बनाया उसमें तीन इलेक्शन कमिश्नर का इसलिए प्राविधान किया गया ताकि जो फैसले हों, वह लोकतांत्रिक तरीके से हों और बहुमत आधारित हों. चीफ इलेक्शन कमिश्नर इज़ फर्स्ट अमंग इक्वल्स. लेकिन वह जिस प्रकार से सत्ता के दबाव में इलेक्शन कमीशन में चीजों को बुलडोज़ कर रहे हैं, वह भारतीय लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं है.


