देहरादून. देश में एक रिजीम चेंज को लेकर विपक्षी दल एकजुट नजर आ रहे हैं. इन सबके बीच पूर्व सीएम हरीश रावत का बड़ा बयान सामने आय़ा है. उन्होंने कहा कि “रिजीम चेंज” (Regime Change) ऐसा लगता है कि एक विस्फोटक शब्द बनकर के भाजपा और भाजपा के चहेतों को बेचैन कर रहा है. लोकतंत्र में सरकार का दायित्व देश और देश के नागरिकों की सुरक्षा, अमन-चैन, सौहार्द, अपनी सरकार का बहुमत बनाए रखना तथा जनता से किए गए वादों को पूरा करना. ये तीन कर्तव्य सर्वव्यापी हैं.

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हरीश रावत ने ये भी कहा कि उसी तरीके से विपक्ष का कर्तव्य है-टू अपोज द गवर्नमेंट, टू डिपोज द गवर्नमेंट, टू प्रपोज द गवर्नमेंट. सीधा अर्थ है कि सरकार की जिन नीतियों से आप सहमत नहीं हैं, जो जनकल्याण के खिलाफ हैं, आप उन पर विरोध संगठित करें और जब संविधान सम्मत अवसर आए, सरकार को उलट दीजिए और उलटने के बाद तीसरा कर्तव्य है, अपनी सरकार बनाइए.

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आगे हरीश रावत ने कहा कि यदि विपक्ष “रिजीम चेंज” की बात नहीं करेगा तो फिर विपक्ष क्या घुइयां छीलेगा? यदि उत्तराखंड में प्रीतम सिंह जी और गोदियाल जी, सरकार हटाओ, धामी हटाओ का स्वर गूंजायमान नहीं करेंगे तो क्या आलू छीलेंगे?