लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भाजपा ने तैयारी तेज कर दी है. पार्टी टिकट बंटवारे के लिए विधायकों के प्रदर्शन और जीत की संभावनाओं पर विचार कर रही है. माना जा रहा है कि 30 से 40 फीसदी मौजूदा विधायकों के टिकट काटे जा सकते हैं. पार्टी दो बार इंटरनल सर्वे भी करा चुकी है. इसके जरिए विधायकों के कामकाज और क्षेत्र में उनकी स्थिति का आकलन किए जाने की बात कही जा रही है. हालांकि, टिकट कटने को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.

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2022 में पुराने उम्मीदवारों का स्ट्राइक रेट ज्यादा

2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 104 मौजूदा विधायकों के टिकट काटे थे. इनकी जगह उतारे गए नए उम्मीदवारों में से 80 ने जीत दर्ज की. उनका स्ट्राइक रेट करीब 77 फीसदी रहा. वहीं, दोबारा टिकट पाने वाले 205 उम्मीदवारों में से 175 जीते. इनका स्ट्राइक रेट करीब 85 फीसदी था. भाजपा ने उस चुनाव में 255 सीटें जीती थीं.

2024 के लोकसभा चुनाव ने बदला नजरिया

2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों से भाजपा को नए चेहरों के फॉर्मूले पर भी विचार करने का आधार मिला. आंकड़ों के मुताबिक, मौजूदा सांसदों की जगह उतारे गए नए उम्मीदवारों ने 16 में से 11 सीटें जीतीं. वहीं, 46 मौजूदा सांसदों में से 20 ही चुनाव जीत सके. उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी भाजपा से आगे निकलकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी.

संगठन में भी किए गए बदलाव

भाजपा ने संगठन में भी बड़े बदलाव किए हैं. प्रदेश समिति के करीब 70 फीसदी चेहरों को बदला गया. महासचिवों, उपाध्यक्षों और छह क्षेत्रीय अध्यक्षों में भी बदलाव किए गए. हालिया राज्यसभा चुनाव में पार्टी ने अपने आठों मौजूदा सांसदों को दोबारा टिकट नहीं दिया और नए उम्मीदवार उतारे.

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जातीय समीकरण और स्थानीय पकड़ भी अहम

भाजपा गुजरात, मध्य प्रदेश, हरियाणा और असम जैसे राज्यों में अपनाए गए टिकट बदलाव के मॉडल से भी सीख लेने पर विचार कर सकती है. लेकिन यूपी में जातीय समीकरण, स्थानीय प्रभाव और विधायकों की व्यक्तिगत पकड़ अहम भूमिका निभाते हैं. ऐसे में पार्टी के सामने चुनौती होगी कि वह सत्ता विरोधी लहर से निपटने के लिए नए चेहरों को मौका दे या जीतने की क्षमता के आधार पर पुराने विधायकों पर भरोसा बनाए रखे. अंतिम फैसला सर्वे, प्रदर्शन और चुनावी समीकरणों के आकलन के बाद ही साफ होगा.