उत्तर प्रदेश सरकार ने 50 किलोवाट तक के कई श्रेणियों के बिजली कनेक्शनों के लिए पूर्व निर्धारित निरीक्षण, NOC और ठेकेदार प्रमाण पत्र की अनिवार्यता हटाकर सेल्फ डिक्लेरेशन की व्यवस्था की है. सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े कुछ प्रतिष्ठानों और निर्धारित परिस्थितियों में पुरानी सुरक्षा प्रक्रिया लागू रहेगी.
लखनऊ. योगी आदित्यनाथ सरकार ने बिजली कनेक्शन लेने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए 50 किलोवाट तक के कई कनेक्शनों के लिए पूर्व निर्धारित विद्युत सुरक्षा निरीक्षण, अनापत्ति प्रमाण-पत्र और लाइसेंसधारी ठेकेदार के कार्यपूर्णता प्रमाण-पत्र की अनिवार्यता खत्म कर दी है. अब निर्धारित शर्तों के तहत उपभोक्ता के सेल्फ डिक्लेरेशन के आधार पर कनेक्शन दिया जा सकेगा.
किन कनेक्शनों को लाभ
अपर मुख्य सचिव ऊर्जा एवं चेयरमैन पावर कॉरपोरेशन डॉ. आशीष गोयल के अनुसार 50 किलोवाट तक के कनेक्टेड लोड वाले एलएमवी-1 घरेलू बत्ती और पंखा, एलएमवी-2 वाणिज्यिक बत्ती और पंखा, एलएमवी-4 सार्वजनिक एवं निजी संस्थान, एलएमवी-5 निजी नलकूप, एलएमवी-9 निजी आवास के निर्माण के लिए अस्थायी विद्युत कनेक्शन और एलएमवी-11 विद्युत वाहन चार्जिंग कनेक्शन को इस व्यवस्था का लाभ मिलेगा. निर्धारित अपवादों को छोड़कर एचवी-4 लिफ्ट और सिंचाई के कनेक्शन भी इसके दायरे में होंगे.
उपभोक्ता को स्व-घोषणा करनी होगी कि उसके परिसर में विद्युत स्थापना का काम राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त लाइसेंसधारी ठेकेदार ने किया है. साथ ही स्थापना केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के निर्धारित सुरक्षा मानकों और भारतीय मानक ब्यूरो के संबंधित मानकों के अनुरूप होने की घोषणा करनी होगी.
इन जगहों पर NOC जरूरी
एलएमवी-2 और एलएमवी-4 श्रेणी के ऐसे प्रतिष्ठानों में जहां 100 या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने की संभावना है, कनेक्शन जारी होने से पहले विद्युत सुरक्षा निदेशालय का अनापत्ति प्रमाण-पत्र और लाइसेंसधारी विद्युत ठेकेदार का कार्यपूर्णता प्रमाण-पत्र लेना अनिवार्य रहेगा.
10 या उससे अधिक बिस्तरों वाले अस्पताल, नर्सिंग होम, शैक्षणिक संस्थान, पुस्तकालय, स्थायी या अस्थायी बैंक्वेट हॉल, हॉस्टल, प्रदर्शनी स्थल, कला दीर्घा, क्रेच, प्ले जोन, थिएटर, संग्रहालय और 150 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले रेस्टोरेंट में भी सार्वजनिक सुरक्षा को देखते हुए विद्युत सुरक्षा निरीक्षण और आवश्यक प्रमाण-पत्र की व्यवस्था जारी रहेगी.
विद्युत निरीक्षक किसी परिसर को सार्वजनिक सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील मानता है तो वह कनेक्शन जारी होने से पहले या बाद में भी अनापत्ति प्रमाण-पत्र और कार्यपूर्णता प्रमाण-पत्र लेने का निर्देश दे सकता है.
कुछ मामलों में नियम अलग
एलएमवी-11 श्रेणी के विद्युत वाहन चार्जिंग प्रतिष्ठानों में बेसमेंट स्थित विद्युत स्थापनाओं के लिए विद्युत सुरक्षा निरीक्षण के बाद NOC और लाइसेंसधारी विद्युत ठेकेदार का कार्यपूर्णता प्रमाण-पत्र आवश्यक होगा. एलएमवी-9 में निजी आवास निर्माण के लिए 50 किलोवाट तक के अस्थायी कनेक्शन को छोड़कर अन्य मामलों में निर्धारित विद्युत सुरक्षा प्रक्रिया का पालन करना होगा.
डॉ. आशीष गोयल ने बताया कि स्व-घोषणा के जरिए कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ता को विद्युत स्थापना की सुरक्षा और निर्धारित मानकों के अनुरूप होने की जिम्मेदारी सुनिश्चित करनी होगी. स्व-घोषणा में गलत जानकारी देने या विद्युत स्थापना से दुर्घटना होने पर संबंधित उपभोक्ता की जिम्मेदारी निर्धारित होगी.
अधिसूचना के अनुसार दो किलोवाट से अधिक स्वीकृत लोड होने पर अर्थ लीकेज प्रोटेक्शन डिवाइस और 250 वोल्ट से अधिक वोल्टेज की स्थिति में निर्धारित अर्थिंग व्यवस्था समेत अन्य सुरक्षा उपायों का पालन करना होगा. सरकार के मुताबिक व्यवस्था का उद्देश्य अनावश्यक औपचारिकताओं को कम करते हुए बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया को सुरक्षित और सरल बनाना है.
IIM लखनऊ में प्रशिक्षण
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने अधिकारियों की प्रबंधकीय दक्षता, नेतृत्व क्षमता और कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए भारतीय प्रबंध संस्थान लखनऊ के दो वर्षीय Blended MBA (bMBA) कार्यक्रम के शैक्षणिक सत्र 2026-28 के लिए अधिकारियों का चयन किया है. इसमें UPPCL और संबद्ध विद्युत निगमों के अधिकारी शामिल हैं.
कार्यक्रम के लिए कुल 70 अधिकारियों का चयन किया गया है. उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के निदेशक (कार्मिक एवं प्रबंधन) डॉ. जान मथाई ने इससे संबंधित आदेश जारी किया है.
यूपीपीसीएल के चेयरमैन डॉ. आशीष गोयल ने बताया कि IIM लखनऊ के इस कार्यक्रम के जरिए चयनित अधिकारियों को आधुनिक प्रबंधन तकनीकों, नेतृत्व विकास, रणनीतिक निर्णय लेने और संगठनात्मक प्रबंधन से संबंधित उच्च स्तरीय प्रशिक्षण एवं ज्ञान प्राप्त होगा.


