शाहजहांपुर. उत्तर प्रदेश में देश का पहला गन्ना विश्वविद्यालय बनाने की तैयारी शुरू हो गई है. वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना की पहल पर गन्ना शोध परिषद को विश्वविद्यालय में उच्चीकृत करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है. अब इस प्रस्ताव पर कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार है. स्वीकृति मिलने के बाद गन्ने की खेती, शोध और उससे जुड़े उद्योगों की पढ़ाई के लिए नया संस्थान स्थापित हो सकेगा.

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यूपी में होता है देश का 45 प्रतिशत गन्ना उत्पादन

देश में गन्ने के कुल उत्पादन का करीब 45 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश में होता है. गन्ने से चीनी, शीरा और गुड़ का उत्पादन किया जाता है. महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा, गुजरात और बिहार समेत कई राज्यों में भी गन्ने की खेती होती है. ऐसे में प्रस्तावित विश्वविद्यालय का लाभ दूसरे राज्यों के किसानों और शोधकर्ताओं को भी मिल सकता है.

गन्ने की नई प्रजातियों पर हो रहा शोध

गन्ने की उन्नत प्रजातियां विकसित करने के लिए लखनऊ स्थित भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान और शाहजहांपुर की गन्ना शोध परिषद में काम होता है. परिषद ने रेड रॉट रोग के प्रति मध्यम रोग-रोधी कई प्रजातियां विकसित की हैं. इनमें कोशा 13235, कोशा 18231, कोशा 17231 और कोशा 19231 शामिल हैं. इनका उत्पादन पुरानी प्रजाति 0238 के लगभग बराबर बताया गया है.

किसानों को बांटी जा रही नई प्रजाति

परिषद ने कोशा 23232 नाम की नई प्रजाति भी विकसित की है. इसे किसानों को वितरित किया जा रहा है. दावा है कि यह प्रजाति लाल सड़न रोग से मुक्त है. वैज्ञानिकों ने दो नए बैक्टीरियल स्ट्रेन भी खोजे हैं. इनके इस्तेमाल से रेड रॉट रोग के प्रति प्रतिरोधी बीज तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है.

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मुख्यमंत्री से चर्चा के बाद शासन को भेजा प्रस्ताव

वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने गन्ना शोध परिषद को विश्वविद्यालय बनाने की पहल की है. उन्होंने बताया कि इस विषय पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से चर्चा हो चुकी है. प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है. अब कैबिनेट की मंजूरी मिलनी बाकी है. विश्वविद्यालय बनने पर गन्ने की खेती, उससे बनने वाले उत्पादों और उनसे जुड़े कारोबार की पढ़ाई व शोध को बढ़ावा मिलेगा.