लखनऊ. उत्तर प्रदेश में बारिश का दौर थम गया है, लेकिन बाढ़ का संकट अभी बना हुआ है. बांधों और बैराजों से छोड़े गए पानी के साथ ऊपरी इलाकों से आ रहा पानी नदियों का जलस्तर बढ़ा रहा है. प्रदेश के 11 जिलों में 10 नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. लखनऊ, लखीमपुर खीरी और उन्नाव में बाढ़ का असर ज्यादा दिखाई दे रहा है.
लखनऊ में 40 हजार से ज्यादा घरों में पानी
लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से फैजुल्लागंज समेत कई रिहायशी इलाकों में पानी भर गया है. करीब 40 हजार से ज्यादा घर प्रभावित बताए जा रहे हैं. कई इलाकों में गलियों में नावें चल रही हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ रहा है. करीब 10 हजार लोगों के पलायन की बात सामने आई है. गोमती रिवर फ्रंट में भी पानी भर गया है और इसे अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है.
लखीमपुर में शारदा का कटान, गांव में पहुंचा बाघ
लखीमपुर खीरी में शारदा नदी का कटान तेज हो गया है. रुरा सुल्तानपुर में नदी के कटान की वजह से पेड़ और एक मकान पानी में समा गए. वहीं बेल्हा सिकटिहा गांव में बाढ़ के पानी के साथ बाघ पहुंचने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई. प्रशासन और वन विभाग की टीमों की निगरानी में बाघ को सुरक्षित निकालने की कोशिश की जा रही है.
उन्नाव में गांव में घुसा मगरमच्छ
उन्नाव में गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद नदी किनारे बसे गांवों में जंगली जीवों के आने का खतरा बढ़ गया है. चंपापुरवा गांव में शनिवार देर रात मगरमच्छ दिखाई दिया. ग्रामीणों ने उसे पकड़कर उसका मुंह बांध दिया. घटना के बाद इलाके में लोगों की भीड़ जुट गई.
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बारिश बंद, फिर क्यों बढ़ रहा जलस्तर?
यूपी में बारिश रुकने के बावजूद नदियों का जलस्तर बढ़ने की वजह ऊपरी इलाकों से आ रहा पानी है. नेपाल, उत्तराखंड और यूपी के ऊपरी हिस्सों में हुई बारिश का पानी नदियों के जरिए मैदानी क्षेत्रों में पहुंच रहा है. इसके अलावा बैराज और जलाशयों से छोड़ा गया अतिरिक्त पानी भी नदियों का जलस्तर बढ़ा रहा है. IMD के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून इस साल 3 अक्टूबर को सामान्य समय से दो दिन पहले यूपी से वापस लौट गया. मानसून ने 30 जून को प्रदेश में दस्तक दी थी.

