मयंक श्रीवास्तव, अयोध्या. अयोध्या नगर से महज 6 किलोमीटर दूर स्थित मुमताज नगर गांव की रामलीला कमेटी सांप्रदायिक सौहार्द की ऐसी मिसाल पेश कर रही है, जो पिछले 62 वर्षों से लगातार कायम है. यहां की रामलीला में मुस्लिम युवक रामायण के विभिन्न पात्रों का अभिनय करते हैं, जो गंगा-जमुनी तहजीब की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत करती है.
रामलीला कमेटी के अध्यक्ष माजिद अली ने इस परंपरा की नींव रखी थी. उन्होंने रामलीला के मंच पर मुस्लिम युवकों को विभिन्न पात्रों में उतारकर हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश दिया. हालांकि राम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान जैसे प्रमुख पात्रों के लिए हर साल हिंदू समुदाय के कलाकारों का ही चयन किया जाता है.
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मुमताज नगर के ग्राम प्रधान गिरधारी यादव के अनुसार, गांव की कुल 6 हजार आबादी में 2 हजार मुस्लिम समुदाय के लोग हैं. यहां सभी लोग आपसी प्रेम, मोहब्बत और भाईचारे के साथ रहते हैं. एक-दूसरे के पर्व-त्योहारों और शादी-ब्याह में बढ़-चढ़कर सहयोग और भागीदारी करते हैं. उन्होंने बताया कि रामलीला में गांव के ही युवक विभिन्न पात्रों के रूप में मंच पर उतरते हैं.
प्रधान का कहना है कि रामलीला की व्यवस्था में गांव के दोनों समुदायों के लोग सहयोग करते हैं. कमी पड़ने पर दूसरे गांवों से चंदा लेकर व्यवस्था पूरी की जाती है. इस वर्ष रामलीला समिति के अध्यक्ष माजिद अली की तबीयत खराब होने के कारण तैयारियों में देरी हुई है. उनका मुंबई में इलाज चल रहा है. रामलीला का मंचन शुरू होगा, जबकि बुधवार को अनुष्ठान और पूजन संपन्न हुआ.
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गौरतलब है कि वर्ष 1963 से ‘रामलीला रामायण समिति’ के बैनर तले इस आयोजन का लगातार आयोजन किया जा रहा है. समिति का मुख्य उद्देश्य हिंदू-मुस्लिम एकता और भाईचारा बढ़ाना है. राम, सीता और लक्ष्मण जैसे कुछ प्रमुख पात्रों को छोड़कर रामायण के अधिकतर पात्रों की भूमिका मुस्लिम युवा निभाते हैं. आयोजन का पूरा खर्च, निर्देशन और प्रबंधन स्थानीय मुस्लिम समुदाय द्वारा ही किया जाता है.

