मयंक श्रीवास्तव, अयोध्या. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के 12 दिसंबर को सपरिवार आगमन को लेकर सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास की बड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है. उन्होंने अखिलेश यादव के अयोध्या आने को सनातन की जीत बताया, लेकिन साथ ही शहीद रामभक्तों की समाधि पर जाकर माफी मांगने की शर्त भी रख दी.
महंत राजू दास ने कहा, “ये सनातन की जीत है. हम लोग शुरू से कह रहे थे. ये लोग वामपंथी विचारों को बढ़ावा देते हैं. एक मजहब, एक संप्रदाय की बात करते हैं. सनातन की बात नहीं कर सकते. लेकिन चलो कम से कम अपनी भूल मानकर अयोध्या आ तो रहे हैं.”
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उन्होंने आगे कहा, “लेकिन एक चीज मेरा निवेदन है. निवेदन ये है कि जितने राम भक्त शहीद हुए हैं, उनकी जो समाधि है वहां आकर माफी मांगें कि हां मेरे पिताजी ने गड़बड़ किया था. राम मंदिर और भी बनना चाहिए था. हमारी पार्टी के जिन-जिन लोगों ने राम मंदिर के विषय पर विरोध किया था, उनकी तरफ से मैं माफी मांगता हूं, सॉरी बोलता हूं. फिर हनुमानगढ़ी आना चाहिए, फिर राम मंदिर दर्शन करके और साधु-संतों से माफी मांगना चाहिए.”
महंत राजू दास ने कहा कि नंबर एक तो ये है कि वाकई में थोड़ा बहुत परिवर्तन आया है. नंबर दो जो महत्वपूर्ण विषय है, वो ये नहीं कि अयोध्या आना, राम मंदिर आना. लाखों लोग राम मंदिर आते हैं, लेकिन जरूरत कब थी? हमको उस समय जरूरत थी. तब तो बाबरी मस्जिद की बात कर रहे थे. जरूरत जब थी तब राम भक्तों की सेना गोली से छलनी कर दी गई.
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उन्होंने कृष्ण जन्मभूमि का मुद्दा भी उठाया. महंत ने कहा, “अब हमको जरूरत है कृष्ण जन्मभूमि की. तुम पहले अयोध्या से पहले कृष्ण जन्मभूमि आओ, वहां की भूमि पूजन करो और एक चर्चा करो कि वहां जो शाही ईदगाह है, उसको ध्वस्त करके और वहां हम मंदिर का निर्माण करेंगे, तब मानेंगे कि वाकई में सनातनी हो, नहीं तो मानेंगे कि जहीर के विचारों के हो. महंत राजू दास ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव को सनातन से कोई लेना-देना नहीं है, चुनाव आ रहा है इसलिए अयोध्या आ रहे हैं.

