लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव का बिगुल भले ही अभी दूर हो, लेकिन सियासी शतरंज की बिसात बिछनी शुरू हो चुकी है। इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अचानक दिल्ली दौरा कई सवाल छोड़ गया है। मंगलवार को सीएम योगी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से कर्तव्य भवन में बंद कमरे में मुलाकात की। करीब एक घंटे चली इस बैठक के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
औपचारिक मुलाकात या फिर
आखिर ऐसे कौन से मुद्दे हैं, जिन पर भाजपा के दो सबसे बड़े चेहरे आमने-सामने बैठे? क्या यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक थी या फिर इसके पीछे 2027 का चुनावी ब्लूप्रिंट तैयार किया जा रहा है? इन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।
राम मंदिर पर सियासत
राजनीतिक जानकारों की मानें तो यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी का मामला विपक्ष के लिए बड़ा राजनीतिक हथियार बन गया है। समाजवादी पार्टी लगातार भाजपा को घेर रही है। राम मंदिर भाजपा की वैचारिक और राजनीतिक धुरी रहा है, ऐसे में पार्टी किसी भी सूरत में इस मुद्दे का असर 2027 के चुनाव पर नहीं पड़ने देना चाहती।
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माना जा रहा है कि बैठक में कानून-व्यवस्था, संगठनात्मक मजबूती, सरकार की उपलब्धियों के प्रचार और विपक्ष के हमलों का जवाब देने की रणनीति पर चर्चा हुई होगी। हालांकि भाजपा की ओर से बैठक के एजेंडे को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है।
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उत्तर प्रदेश भाजपा के लिए अहम राज्य
उत्तर प्रदेश भाजपा के लिए सबसे अहम राज्य है। वर्ष 2017 में भाजपा गठबंधन ने 325 सीटें जीतकर इतिहास रचा था, जबकि 2022 में 274 सीटों के साथ लगातार दूसरी बार सरकार बनाई। अब पार्टी तीसरी बार सत्ता में वापसी की तैयारी में जुटी है।
ऐसे में राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि दिल्ली में हुई यह मुलाकात केवल एक शिष्टाचार भेंट नहीं, बल्कि ‘मिशन 2027’ की रणनीति को धार देने की कवायद भी हो सकती है। राम मंदिर से लेकर चुनावी गणित तक, दिल्ली की इस बैठक ने उत्तर प्रदेश की सियासत का पारा जरूर बढ़ा दिया है।

